भिलाई। विधानसभा चुनाव के बाद से एक-एक साँस के लिए छटपटा रही छत्तीसगढ़ भाजपा को कवर्धा में आक्सीजन की आस दिखी है। पार्टी के लगभग सभी बड़े नेताओं ने कवर्धा मसले को अपने-अपने तरीके से उठाया है। दरअसल, भाजपा को कवर्धा के जरिए हिंदुत्व के एजेंडे को दमदारी के साथ सामने लाने का बड़ा अवसर मिला है। यही वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से लेकर प्रदेश भाजपाध्यक्ष विष्णुदेव साय, धरम कौशिक, बृजमोहन अग्रवाल, सरोज पाण्डेय समेत कई अन्य नेता इस मामले पर सरकार और स्थानीय विधायक को घेरने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में मामले को और हवा देने की तैयारी है। इधर, खबर है कि जनवरी में पार्टी सरगुजा में चिंतन कर सकती है। इससे पहले बस्तर में चिंतन बैठक हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि 3 अक्टूबर को कवर्धा में धार्मिक झंडा लगाने के बाद उपजे विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। मामले में एक स्थानीय युवक दुर्गेश देवांगन की जमकर पिटाई भी की गई। घटना के बाद वहां धारा 144, कफ्र्यू, इंटरनेट सेवाएं बंद करने समेत तमाम तरह के इंतजामात किए गए थे। भाजपा इस मामले को लेकर सरकार और स्थानीय विधायक व मंत्री पर हमलावर है। भाजपा समेत हिंदूवादी संगठनों के कई बड़े नेता व कार्यकर्ता अब भी कवर्धा व दुर्ग की जेलों में बंद हैं। डॉ. रमन, क्योंकि स्वयं कवर्धा के निवासी हैं, इसलिए वे लगातार कवर्धा पहुंचकर हालातों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने घटना के लिए स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था। उनके मुताबिक,- दो समुदायों के बीच के मामूली विवाद को हल करने में प्रशासन और पुलिस नाकाम रही। इसी वजह से हिंसा भड़की। घटना के 3 दिन बाद नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक एक प्रतिनिधिमंडल को लेकर कवर्धा पहुंचे।
भगवा समर्थकों को जेल
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह त्यौहार से पहले जेल में बंद भाजपा के प्रदेश मंत्री विजय शर्मा से मिलने कवर्धा पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भगवा झंडा उठाने वालों को जेल भेज रही है। डॉ. सिंह ने स्पष्ट कहा कि यह सब कुछ स्थानीय विधायक व मंत्री के चलते हो रहा है। बेगुनाहों को साजिशन जेल में डाला गया है। कवर्धा को कबीर और शंकराचार्य की नगरी बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के लिए बहुसंख्यकों को कुचला जा रहा है। राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय भी विजय शर्मा से मिलने कवर्धा पहुंची। उन्होंने बंदियों को जमानत नहीं मिलने को राजनीतिक षडय़ंत्र बताया और बिना किसी का नाम लिए कहा कि जिन्होंने वैमनस्यता फैलाई, वे दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। इससे पहले पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी सरकार के खिलाफ सख्त रूख दिखा चुके हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि यदि धर्मरक्षक अपने घर में दीवाली नहीं मना पाए तो सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।
9 को आएंगी पुरंदेश्वरी, बनेगी रणनीति
भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी आगामी 9 नवम्बर को छत्तीसगढ़ आ रही हैं। हालांकि उनका आगमन दीपावली मिलन समारोह के लिए हो रहा है, किन्तु पार्टी सूत्र बताते हैं कि इस दौरान भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा होने की पूरी संभावना है। खासतौर पर धर्मांतरण और कवर्धा के जरिए बड़े आंदोलन की तैयारी की रूपरेखा तय होगी। प्रदेश की कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए भी रणनीति तैयार की जाएगी। पिछले दिनों राष्ट्रीय संगठन महामंत्री शिवप्रकाश सरगुजा में बैठक करने पहुंचे थे। पुरंदेश्वरी के आगमन पर सरगुजा चिंतन बैठक पर भी चर्चा संभव है। कुल मिलाकर भाजपा अवसरों को भुनाने की पुरजोर तैयारी में है।
भाजपा का भगवा चेहरा होंगे दुर्गेश?
झंडा विवाद के बाद सुर्खियों में आए स्थानीय युवा दुर्गेश देवांगन को कवर्धा विधानसभा क्षेत्र से टिकट देने की मांग अभी से उठने लगी है। दुर्गेश वही युवा है, जिसने भगवा झंडे के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी। विरोधियों ने दुर्गेश को सरेआम और बेरहमी से पीटा भी था। घटना के बाद दुर्गेश देवांगन अचानक लापता हो गए थे। बाद में उन्होंने रायपुर से गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जेल भेज दिया गया। जिस तरह से भाजपा कवर्धा मामले को जोर-शोर से उठा रही है, उसके बाद पार्टी के ही भीतर यह फुसफुसाहट प्रारम्भ हो गई है कि दुर्गेश देवांगन को कवर्धा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया जा सकता है।




