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हरियाली की ओर बढ़ते कदम : वृहद पौधरोपण बना पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार

By Mohan Rao Published May 31, 2026
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वैज्ञानिक प्रबंधन और जनसहभागिता से बंजर भूमि बनी हरित संपदा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा प्रदेश के वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, संवर्धन और राजस्व वृद्धि के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने पिछले पांच वर्षों में वृहद पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

परियोजना मंडल ने बंजर और कम घनत्व वाले वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर उन्हें हरित संपदा में बदलने का सफल प्रयास किया है। यह कार्य हरित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कवर्धा परियोजना मंडल ने वर्ष 2021 से 2025 तक आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया है। इससे वन क्षेत्र का विस्तार हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है।

सागौन रोपण से तैयार हो रहा ‘ग्रीन गोल्ड’
परियोजना मंडल द्वारा 1497 हेक्टेयर वन क्षेत्र में लगभग 25 लाख सागौन पौधों का रोपण किया गया है। इसके लिए रूटशूट तकनीक (स्टंप प्लांटेशन) का उपयोग किया गया, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से विकसित हुईं और उनकी वृद्धि बेहतर रही। यह तकनीक पौधों को मौसम और कीटों के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षित रखने में भी कारगर साबित हुई है।

मिश्रित प्रजातियों से बढ़ी जैव विविधता
हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत 25 हेक्टेयर क्षेत्र में 22 हजार मिश्रित प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हुआ है और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिला है। व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 6.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 15 हजार क्लोनल नीलगिरी पौधों का सफल रोपण किया गया है। यह भविष्य में त्वरित उत्पादन और राजस्व वृद्धि का आधार बनेगा।

बिना फेंसिंग के 80 प्रतिशत से अधिक पौधे सुरक्षित
कवर्धा परियोजना मंडल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि विशाल पौधरोपण क्षेत्र में कहीं भी कृत्रिम फेंसिंग नहीं की गई। इसके बावजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से पौधों की जीवितता दर 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यह कुशल प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

भविष्य में मिलेगा मजबूत राजस्व आधार
वन विकास निगम की आय का प्रमुख स्रोत सागौन का वैज्ञानिक विरलन है। वर्तमान में लगाए गए सागौन पौधे आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाली इमारती लकड़ी उपलब्ध कराएंगे, जिससे निगम को राजस्व प्राप्त होगा और आर्थिक मजबूती मिलेगी। वृहद पौधरोपण से भविष्य में लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण होगा, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही जल संरक्षण बढ़ेगा, मृदा अपरदन रुकेगा और वन्यजीवों को नया आवास मिलेगा।

स्थानीय ग्रामीणों को मिला रोजगार
रोपण, निंदाई-गुड़ाई और संरक्षण कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता से रोजगार दिया गया। इससे वनांचल के लोगों की आय बढ़ी और विभागीय कार्यों के प्रति उनका विश्वास मजबूत हुआ। कवर्धा परियोजना मंडल की यह सफलता दर्शाती है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, बेहतर प्रबंधन और जनसहभागिता से पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

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