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वंदेमातरम पर सरकार की नई गाइडलाइन : राष्ट्रगान से पहले बजेगा राष्ट्रगीत, वंदेमातरम् के दौरान खड़े रहना अनिवार्य

By Mohan Rao
Published: February 11, 2026
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वंदेमातरम की झांकी
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नईदिल्ली ए.। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केन्द्र सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए है। अब स्कूलों से लेकर सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के आधिकारिक छह अंतरों का गायन या वादन अनिवार्य होगा। इसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड की गई है। साथ ही गृह मंत्रालय ने अपने निर्देशों में साफ कहा कि वंदे मातरम् बजने पर सभी को खड़ा होना अनिवार्य रहेगा। सरकार ने यह भी कहा कि कि स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से होनी चाहिए।

गृह मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी कर बताया है कि अगर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को एक साथ गाया या बजाया जाता है, तो ऐसे में वंदे मातरम पहले बजाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। ताकि सम्मान और राष्ट्रीय भावना का स्पष्ट संदेश मिले। नए नियमों के अनुसार अब वंदे मातरम का छह पैराग्राफ वाला 3 मिनट और 10 सेकंड का पूरा संस्करण बजाया जाएगा। इसमें दुर्गा सहित तीन हिंदू देवियों का उल्लेख है। अब तक वंदे मातरम के मूल गीत के छह पैरा में से केवल पहले दो पैरा ही गाए जाते थे।

कहां-कहां बजाना होगा अनिवार्य
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि वंदे मातरम् का छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि का संस्करण कई आधिकारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाएगा। इनमें तिरंगा फहराने के दौरान, कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन पर, उनके भाषणों और राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, राज्यपालों के आगमन और उनके भाषणों से पहले और बाद में शामिल हैं।

इन जगहों पर दी गई है छूट
प्रोटोकॉल में कुछ छूट भी दी गई हैं। अगर ‘वंदे मातरम्’ किसी न्यूज रील, डॉक्यूमेंट्री या फिर फिल्म का हिस्सा है, तो ऐसे में दर्शकों को खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे सार्वजनिक स्थानों में अफरा-तफरी या अव्यवस्था न फैले। इससे पहले केंद्र सरकार ने हाल ही में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर जश्न भी मनाया था। इसके अलावा संसद में इस पर चर्चा हुई थी। गणतंत्र दिवस परेड के दौरान राष्ट्रगीत पर आधारित झांकियों का प्रदर्शन शामिल था।

बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया।

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