बाल समागम में छोटे छोटे बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से आध्यत्मिक संदेश दिया गया
जोन स्तरीय बाल संत समागम में दुर्ग, भिलाई के अलावा राजनांदगांव, खैरागढ़, दल्ली राजहरा,कांकेर के बच्चो ने अपनी अपनी प्रस्तुति दी। छोटे बच्चों द्वारा गीत, नृत्य व नाटक के माध्यम से निरंकारी सदगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संदेश सहनशीलता, विनम्रता, विशालता, समर्पण व सदभावना का संदेश प्रसारित किया। कांकेर से आये बच्चो ने अपने एक नाटक के माध्यम से यह बात बताई की माया,धन दौलत की उपयोगिता सिर्फ सांसारिक सुख भोगने तक ही है लेकिन आध्यात्मिक सुख सदगुरु के चरणों मे ही है।

शिकवा शिकायत न करे हम शिकवे से शूकर में आये ।ये संदेश एक नृत्य के माध्यम से बच्चो ने दिया। छत्तीसगढ़ महतारी का समरण करते हुए छत्तीसगढि गीत पर नृत्य ने पारंपरिक वातावरण का ऐसा समा बनाया की सारी संगत झूमने लगी।प्यार व आपसी भाईचारे का संदेश दिया। कवि दरबार मे छोटे कवियों व कवित्रियों ने संदेश दिया मनमत छोड़े,गुरमत अपनाए जीवन की बगिया को महकाये। कवि दरबार मे हिन्दी ,अंग्रेजी, छत्तीसगढि,पंजाबी व सिन्धी भाषा का सहारा लिया।बाल कवि ने बताया कि मानव का जीवन डिजिटल हो गया है लेकिन खुशी व आनंद की कमी है,ब्रह्मज्ञान से ही आनंद व खुशियां आती है।

नन्हे सूफी कलाकारों ने सभी को इस परमात्मा से जोड़ दिया।गायन में बच्चो ने सारी संगत को भक्ति के भाव में विभोर कर दिया। खैरागढ़ के बच्चो ने अपनी प्रस्तुति में सत्संग की महिमा का वर्णन किया। दुनियावी सुख कितने भी प्राप्त कर ले लेकिन आत्मा सत्संग से ही तृप्त होती है। खुशियों भरा सिन्धी नृत्य सभी को रूहानियत की खुशी दे रहा था। भंगड़ा नृत्य जिसमे बच्चो ने अनेकता में एकता व अमन शांति का संदेश दिया।
आगरा से पधारे युवा संत अमन महेंद्रू जी ने पूरी संगत को संबोधित करते हुए सार गर्भित वचनों में फरमाया की। ये गुरु की कृपा ही है जो छोटे बच्चो को सत्संग से जोड़ा है।बच्चे सत्संग में सेवा,आदर,सम्मान व नैतिकता की शिक्षा सीखते है तो वे अपने घरों में अपने माता पिता के चरण स्पर्श करते है आदर सम्मन करते है वो सिखलाई अपने घरों में अपनाकर अच्छे नागरिक होने का प्रमाण प्रस्तूत करते है।
उन्होंने फरमाया हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी अच्छी चीजें खाते है,क्या ऐसा कोई खाना है भोजन है जो मन को बलवान करे।सत्संग ही वो भोजन है जो मन को इस आत्मा को बलवान बनाता है।सत्संग से ही सहनशीलता आती है ,विशालता आती है।सत्संग से ही क्रोध नम्रता में परिवर्तित होता है।और सत्संग में हमे तत्वज्ञानी मिलता है जो इस प्रभु परमात्मा के दर्शन करा देता है और प्रभु की प्राप्ति ही मानव जीवन का लक्ष्य है।
जोनल इंचार्ज श्री गुरुबख्श कालरा जी ने अपने आशीर्वचन में फरमाया कि बच्चे बचपन से जब सत्संग से जुड़ जाते है तो ही सही मायने में एक अच्छा इंसान बनकर समाज को एक अछि देंन देते है सत्संग में शिक्षा दी जाती है कि किसी से दगा नही करना किसी से धोखा नही करना। संचालन निकिता डिंगा ,गंगा मखीजा व तुलसी साधवानी ने किया।आये हुए सभी ब्रांच के बाल संतो का आभार अशोक गोयल जी ने किया। प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सूचना सहायक जनसंपर्क अधिकारी शंकर सचदेव ने दी।




