दुर्ग भिलाई के श्रद्धालुओं ने दी छतीसगढ़ी भक्ति गीत की प्रस्तुति
भिलाई। “जागरूकता केवल बाहरी सजगता तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतन रहना आवश्यक है।’’ इसी आध्यात्मिक संदेश का आह्वान करते हुए निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के दूसरे दिन उपस्थित विशाल मानव परिवार को संबोधित किया।
इस चार दिवसीय सन्त समागम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु एवं भक्त एकत्रित हुए। छत्तीसगढ़ प्रदेश से हजारों श्रद्धालु इस समागम में शामिल हुए है। दुर्ग भिलाई से संयोजक सतपाल सिंह सैनी के नेतृत्व में 500 से अधिक श्रद्धालुओं का दल इस आध्यत्मिक मेले में शामिल हुआ है। विभिन्न भाषाओं एवं संस्कृतियों से सम्मिलित इस विशाल मानव परिवार का प्रेमपूर्ण मिलन सौहार्द, सद्भावना और विश्वबंधुत्व की अनुपम छवि प्रस्तुत कर रहा है।
ब्रांच दुर्ग भिलाई के राजकुमार व निशा निर्मलकर की टीम ने छतीसगढ़ की परंपरा को दर्शाते हुए छतीसगढ़ भाषा मे एक भक्ति रचना की प्रस्तुति दी।लाखो की दर्शक दीर्घा में सभी ने छतीसगढ़ी रचना को सराहा। सतपाल सैनी जी ने बताया कि दुर्ग भिलाई के सेवादल प्रकाशन विभाग व प्याऊ में अपनी सेवाएं निरंतर दे रहे है। समागम का वातावरण आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और आपसी प्रेम के भावों से परिपूर्ण है।
सतगुरु माता जी ने आध्यात्मिक ‘जागृति’ के वास्तविक भाव को स्पष्ट करते हुए फरमाया कि जागरूकता केवल बाहरी सजगता तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतन रहना आवश्यक है। सन्त समागम में आधुनिक तकनीक, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों से सुसज्जित निरंकारी प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनी हुई है। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं विभिन्न आयु वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है। यह जानकारी सहायक जनसंपर्क अधिकारी शंकर सचदेव व संजीत चक्रवर्ती ने दी।




