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चिरायु योजना बच्चों के लिए बनी वरदान, तीनों बच्चों के चेहरे की लौटी मुस्कान, माता-पिता के जीवन में जगी नई उम्मीद

By Poonam Patel
Published: December 10, 2025
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परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति जताया आभार
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रायपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व चिरायु योजना में शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर समेत 44 की गंभीर बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च शासन द्वारा उठाया जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग का चिरायु दल बच्चों  की स्क्रीनिंग कर शासन को रिपोर्ट भेजता हैं, जिसके आधार पर बच्चों के इलाज के लिए फंड जारी होता है। ऐसे बच्चे जिनका इलाज निःशुल्क किया जाना है, स्वजन स्वास्थ्य विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु योजना बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इस योजना ने न केवल कई मासूम बच्चों को नई जिंदगी दी है, बल्कि गरीब परिवारों के चेहरों पर भी फिर से मुस्कान लौटा दी है। जिले में बीमारी की पुष्टि होने पर 3 बच्चों को रायपुर ले जाकर उनका सफल एवं निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और उनके मासूम चेहरों की मुस्कान माता-पिता के जीवन में नई उम्मीद और सुकून भर रही है। 

चिरायु टीम द्वारा स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में जन्मजात हृदयरोग, कटे-फटे होंठ एवं तालू  से पीड़ित बच्चों की जॉच खोज

कलेक्टर जशपुर के निर्देश पर चिरायु टीम जिले के विभिन्न स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सक्रिय रूप से जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही है। गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति पाए जाने पर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी चिरायु के मार्गदर्शन में विकासखंड पत्थलगांव की चिरायु टीम के द्वारा अलग-अलग स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर जन्मजात हृदयरोग, कटे-फटे होंठ एवं तालू तथा अन्य शल्य-चिकित्सा योग्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान की गई। 

चिरायु योजना बच्चों के लिए भी बनी वरदान

बीमारी की पुष्टि होने पर 3 बच्चों को रायपुर ले जाकर उनका सफल एवं निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र गौटियापारा, कोतबा में जांच के दौरान 4 वर्षीय समीर खड़िया जन्मजात हृदयरोग से पीड़ित पाए गए। चिरायु टीम ने उन्हें रायपुर भेजकर निःशुल्क हृदय ऑपरेशन कराया। इसी प्रकार प्राथमिक शाला धनुपारा, मुड़ाबहला में 8 वर्षीय स्तुति तिर्की में जन्मजात हृदयरोग पाया गया, जिनका सफल उपचार कराया गया और आंगनबाड़ी केंद्र कार्राडांड, चिकनीपानी के 01 वर्षीय जॉन्सन टोप्पो के होंठ एवं तालू में विकृति पाए जाने पर उनका भी रायपुर में निःशुल्क ऑपरेशन किया गया। आज तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और उनके मासूम चेहरों की मुस्कान माता-पिता के जीवन में नई उम्मीद और सुकून भर रही है। 

जांच के बाद 44 प्रकार की बीमारियों और विकृतियों की पहचान कर श्रेष्ठ अस्पतालों में कराया जाता है उपचार

परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और चिरायु टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार ने उनकी पीड़ा को समझकर बच्चों का उपचार निःशुल्क कराकर उन्हें नया जीवन दिया है। उल्लेखनीय है कि चिरायु योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच की जाती है। जांच के बाद 44 प्रकार की बीमारियों और विकृतियों की पहचान कर आवश्यकता अनुसार बच्चों को देशभर के श्रेष्ठ अस्पतालों में भेजकर उनका उपचार कराया जाता है।

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर के इलाज का पूरा खर्च शासन

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व चिरायु योजना में शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर समेत 44 की गंभीर बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च शासन द्वारा उठाया जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग का चिरायु दल बच्चों  की स्क्रीनिंग कर शासन को रिपोर्ट भेजता है, जिसके आधार पर बच्चों के इलाज के लिए फंड जारी होता है। ऐसे बच्चे जिनका इलाज निल्क किया जाना है, स्वजन स्वास्थ्य विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं।

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