नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना को स्वदेश में विकसित लड़ाकू विमान तेजस की 48 हजार करोड़ रुपये के खरीद सौदे के तहत पहली डिलीवरी मार्च, 2024 में मिलेगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के चेयरमैन आर. माधवन ने रविवार को कहा कि पहली डिलीवरी में चार विमान दिए जाने के बाद 2025 से 83 विमानों की सप्लाई पूरी होने तक हर साल 16 विमान वायुसेना को उपलब्ध कराए जाएंगे।
एचएएल के प्रबंध निदेशक पद की भी जिम्मेदारी संभाल रहे माधवन ने यह भी दावा किया कि कई देश इस भारतीय लड़ाकू विमान की खरीद में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और कंपनी को अगले दो साल में इस विमान का पहला निर्यात आर्डर मिल जाने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अन्य देश का आर्डर मिलने का कोई भी असर भारतीय वायुसेना को विमान की डिलीवरी देने की टाइमलाइन पर नहीं पड़ेगा, बल्कि इसके लिए एचएएल आवश्यकता पडऩे पर अलग से नया प्लांट लगाएगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने 13 जनवरी को वायुसेना के लिए तेजस के ज्यादा उन्नत संस्करण मार्क-1ए के 73 विमान खरीदने के साथ ही इसके 10 ट्रेनर संस्करण खरीदने के सौदे को मंजूरी दी थी। करीब 48 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे के औपचारिक अनुबंध पर भारतीय वायुसेना और एचएएल आगामी 5 फरवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में एयरो इंडिया शो के दौरान हस्ताक्षर करेंगे।
यह विमान सौदा तेजस के शुरुआती संस्करण वाले उन 40 विमानों के अतिरिक्त है, जिनका एक बैच अभी तक वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। एचएएल चेयरमैन ने 48 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे में किस मद में कितना खर्च किया जाएगा, इसका ब्योरा भी सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा, तीन साल की रणनीतिक टाइमलाइन ढांचागत विकास और विमान की डिलीवरी के लिए रखी गई है।
563 घरेलू कंपनियों को होगा लाभ
एचएएल चेयरमैन ने कहा कि तेजस कार्यक्रम से भारत में पूरे एयरोस्पेस सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें फिलहाल 563 घरेलू कंपनियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों की संख्या बढ़कर 600 से 650 तक पहुंच सकती है, जो पूरे इकोसिस्टम के लिए बेहद अहम है। सरकार का ध्यान फिलहाल घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने का है और इसके लिए 2025 तक घरेलू रक्षा उत्पादन का टर्नओवर 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।





