भिलाई। छत्तीसगढ़ समाज शास्त्रीय परिषद तथा स्वर्गीय बिंदेश्वरी बघेल शासकीय महाविद्यालय कुम्हारी के संयुक्त तत्वावधान में वैश्वीकरण एवं उभरता पर्यावरणीय संकट : नागरिक समाज की भूमिका विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 30 एवं 31 जनवरी को बरडिया भवन में संपन्न हुई।
प्राचार्य एवं संगोष्ठी की संरक्षक डॉ. सोनिता सत्संगी ने अपने स्वागत उद्बोधन में समाजशास्त्र और पर्यावरण संरक्षण के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए स्वर्गीय प्रो. जीपी शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
संगोष्ठी के अध्यक्षीय उद्बोधन में छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय परिषद की अध्यक्ष प्रो. प्रीति शर्मा ने समाज एवं पर्यावरण के गहन अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में नागरिक समाज की भूमिका और भी अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक चेतना, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के बिना पर्यावरण संरक्षण की कल्पना अधूरी है।
परिषद के सचिव डॉ. एलएस गजपाल ने वैश्वीकरण से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए सामाजिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया। विशेष व्याख्यान सत्र में प्रो. मनीष के. वर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. एम. नायक तथा मुख्य वक्ता डॉ. के. सुब्रमण्यम ने आधुनिक जीवनशैली, औद्योगिक गतिविधियों एवं उनसे उत्पन्न पर्यावरणीय असंतुलन पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक वक्तव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन किया गया तथा डॉ. सुनीता अग्रवाल की पुस्तक का विधिवत विमोचन भी संपन्न हुआ।
द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। संगोष्ठी का द्वितीय दिवस, 31 जनवरी, पूर्णत: स्वर्गीय प्रो. जी. पी. शर्मा की स्मृति को समर्पित रहा। इस अवसर पर उनके परिवारजनों की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम को भावनात्मक गरिमा और आत्मीयता से भर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. महेश शुक्ला के प्रेरक वक्तव्य से हुआ, जिसमें उन्होंने स्वर्गीय प्रो. शर्मा के जीवन-दर्शन, अकादमिक यात्रा और उनकी अदम्य जिजीविषा पर प्रकाश डाला।




