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मोदी सरकार ने व्यापारियों को दी राहत, अब 40 लाख तक की सालाना कमाई पर जीएसटी से छूट

By @dmin
Published: August 24, 2020
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मार्च में जीएसटी संग्रह ने बनाया नया रिकॉर्ड, सरकार को मिले 1.23 लाख करोड़ रुपये
मार्च में जीएसटी संग्रह ने बनाया नया रिकॉर्ड, सरकार को मिले 1.23 लाख करोड़ रुपये
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नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मोर्चे पर करदाताओं को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने व्यापारियों को दी जाने वाली जीएसटी छूट का दायरा दोगुना कर दिया है। अब 40 लाख रुपये तक की सालाना कमाई करने वाले कारोबारियों को जीएसटी से छूट मिलेगी। जबकि पहले यह सीमा 20 लाख रुपये थी। इतना ही नहीं, जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये तक है, वे कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुन सकते हैं। उन्हें केवल एक फीसदी की दर से टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा। 
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जीएसटी लागू होने के बाद टैक्सपेयर बेस लगभग डबल हुआ है। जब जीएसटी लागू हुआ था, उस समय जीएसटी द्वारा कवर किए गए एसेसीज की संख्या करीब 65 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.24 करोड़ से ज्यादा हो गई है। साथ ही जीएसटी में सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह से स्वचालित हैं।

The taxpayer base has almost doubled since the rollout of GST. The numbers of assessee covered by the GST at the time of its inception were about 65 lakh. Now the assessee base exceeds 1.24 crore. All processes in GST have been fully automated: Ministry of Finance https://t.co/D1eMJoN9Oq

— ANI (@ANI) August 24, 2020

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की पहली पुण्यतिथि पर वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी से पहले मूल्यवर्धित कर (वैट), उत्पाद शुल्क और बिक्री कर देना पड़ता था। सामूहिक रूप से इनकी वजह से कर की मानक दर 31 फीसदी तक पहुंच जाती थी। मंत्रालय ने कहा, ‘अब व्यापक रूप से सब मानने लगे हैं कि जीएसटी उपभोक्ताओं और करदाताओं दोनों के अनुकूल है। जीएसटी से पहले कर की ऊंची दर की वजह से लोग करों का भुगतान करने में प्रोत्साहित होते थे। लेकिन जीएसटी के तहत निचली दरों से कर अनुपालन बढ़ा है।
जीएसटी में 17 स्थानीय शुल्क समाहित हुए हैं। देश में जीएसटी को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली वित्त मंत्री थे। मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘आज हम अरुण जेटली को याद कर रहे हैं। जीएसटी के क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इतिहास में इसे भारतीय कराधान का सबसे बुनियादी ऐतिहासिक सुधार गिना जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि लोग जिस दर पर कर चुकाते थे, जीएसटी व्यवस्था में उसमें कमी आई है। राजस्व तटस्थ दर (आरएनआर) समिति के अनुसार राजस्व तटस्थ दर 15.3 फीसदी है। वहीं रिजर्व बैंक के अनुसार अभी जीएसटी की भारित दर सिर्फ 11.6 फीसदी है।

तेल, टूथपेस्ट व साबुन जैसी आम वस्तुओं पर कर हुआ कम: वित्त मंत्रालय

केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मोर्चे पर करदाताओं को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि रोजमर्रा में काम आने वाले उत्पाद जैसे बालों का तेल, टूथपेस्ट और साबुन जैसी आम उपयोग की वस्तुओं की कर दर पूर्व-जीएसटी युग के 29.3 फीसदी से कम होकर 18 फीसदी हो गई है। 
मंत्रालय ने कहा कि पहले 230 उत्पाद सबसे ऊंचे 28 फीसदी के कर स्लैब में आते थे। आज 28 फीसदी का स्लैब सिर्फ अहितकर और लग्जरी की वस्तुओं पर लगता है। इनमें से 200 उत्पादों को निचले कर स्लैब में स्थानांतरित किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि आवास क्षेत्र पांच फीसदी के कर स्लैब के तहत आता है। वहीं सस्ते मकानों पर जीएसटी की दर को घटाकर एक फीसदी कर दिया गया है।

Common-use items such as hair oil, toothpaste & soap have seen their tax rates come down from 29.3% in the pre-GST era to just 18% under GST: Ministry of Finance pic.twitter.com/UMfBJ039X4

— ANI (@ANI) August 24, 2020

सिनेमा टिकट पर पहले 35 फीसदी से 110 फीसदी तक कर लगता था, लेकिन जीएसटी शासन में यह 12 फीसदी और 18 फीसदी तक है। दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुएं शून्य या पांच फीसदी स्लैब में हैं। 
फ्रिज, वॉशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, वुड ब्रेनर और मिक्सर, जूस निकालने वाली मशीन, शेवर, हेयर क्लिपर, वॉटर हीटर, हेयर ड्रायर, इलेक्ट्रिक स्मूथिंग आयरन, 32 इंच तक के टेलीविजन पर पहले कर की दर 31.3 फीसदी थी, अब ये उत्पाद 18 फीसदी के जीएसटी कर दायरे में हैं।

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