-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ न केवल श्रीराम का ननिहाल है बल्कि उनके कर्मजीवन का एक बड़ा अंश भी इसी पुण्यभूमि पर घटित हुआ है. पिता की आज्ञा पर वनवास के लिए निकले राम ने दण्कारण्य में काफी वक्त गुजारा। यहां भयानक असुरों से उनका मुकाबला हुआ। किसी का उन्होंने संहार किया तो किसी को शाप से मुक्ति दिलाई। जन-जन के ये राम अब भी यहां के कण-कण में विद्यमान हैं। छत्तीसगढ़ में श्रीराम का एक अलग ही स्वरूप है जो पूरे देश से भिन्न है। यहां के लोग श्रीराम से प्रेम करते हैं। इस प्रेम की पराकाष्ठा दिखाई देती है यहां के रामनामी समुदाय के आचार व्यवहार में। इस समुदाय के लोग अपने पूरे शरीर पर रामनाम का गोदना गुदवाते हैं। समय के साथ यह चलन कम जरूर हुआ है पर अब भी विलुप्त नहीं हुआ। आज भी ये लोग रामनामी अंगवस्त्र धारण करते हैं। समूचा छत्तीसगढ़ श्रीराम को भांजा मानता है और उनसे उसी रूप में प्रेम करता है। श्रीराम के ही निमित्त यहां भांजों के पैर पूजे जाते हैं। देश में अकेला छत्तीसगढ़ ही है जहां लोग मिलने पर एक दूसरे को राम-राम कहकर संबोधित करते हैं। इस रामराज्य में नफरत नहीं है, संहार नहीं है। है तो केवल निश्छल प्रेम, सबके लिए सहृदयता और सभी के प्रति सहानुभूति। छत्तीसगढ़ के राम त्यागी हैं, तपस्वी हैं, सभी जीव-जंतुओं के प्रिय हैं और व भी इन सबसे उतना ही प्रेम करते हैं। श्रीराम की इसी पुण्यभूमि से समग्र मानवता के लिए कई संदेश निकले। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जन्म लेने वाले मनीषियों ने श्रीराम के इस रूप और गुण का खूब बखान भी किया। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में रामायण मंडलियां आज भी इस धरोहर को न केवल थामे हुए है बल्कि आगे भी बढ़ा रही हैं। इसी को एक विराट रूप में प्रस्तुत करने की पहल ‘ककाÓ के नाम से जाने जाने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की है। आज रायगढ़ के प्रसिद्ध रामलीला मैदान में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का शुभारंभ हो रहा है। कंबोडिया और इंडोनेशिया की रामायण मंडलियां को भी शामिल कर लें तो यह देश का पहला अंतरराष्ट्रीय आयोजन भी है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें रामायण के अरण्यकांड से ही प्रसंग लिये जाएंगे। इसमें तुलसी कृत रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों को लिया जाएगा। अन्य राज्यों तथा देशों के कलाकार अपनी स्थानीय मान्यताओं के अनुरूप इन्हीं प्रसंगों को प्रस्तुत करेंगे। कंबोडिया के अंगकोरवाट और इंडोनेशिया के जावा मंदिरों में प्रचलित रामकथा से भी लोगों का परिचय होगा। छत्तीसगढ़ में श्रीराम वनगमन परिपथ का निर्माण हो रहा है। जहां-जहां से होकर श्रीराम आगे बढ़े, उनके चिन्हों की पहचान कर उनका पुनरुद्धार किया जा रहा है। इस आयोजन में देश-विदेश की रामायण मंडलियां पहुंच रही हैं। यह मौका है छत्तीसगढ़ के श्रीराम गमन परिपथ और इसके 9 विशिष्ट परिसरों को विश्व समुदाय के सामने रखने का। इससे धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।





