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छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरक संकट: खरीफ के लिए जरूरत है 11.75 लाख मेट्रिक रासायनिक उर्वरक की और केन्द्र सरकार ने की अब तक मात्र 5.26 लाख मेट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति

By @dmin
Published: July 9, 2021
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Chhattisgarh needs 11.75 lakh metric chemical fertilizers for Kharif
Chhattisgarh needs 11.75 lakh metric chemical fertilizers for Kharif
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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ने खरीफ 2021 सीजन के लिए केन्द्र सरकार से 11.75 लाख टन रासायनिक उर्वरकों के आपूर्ति की मांगी की थी, इसके विरूद्ध 7 जुलाई तक छत्तीसगढ़ को मात्र 5.26 लाख मेट्रिक टन रासायनिक खाद प्रदाय की गई है, जो मांग का 45 प्रतिशत है, जिसके चलते राज्य में रासायनिक खाद की किल्लत बनी हुई है। बीते 6 वर्षों की तुलना में इस साल खरीफ सीजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को अब तक रासायनिक उर्वरकों की आधी -अधूरी मात्रा ही मिल पाई है। यही वजह है कि राज्य में किसानों की मांग के अनुसार रासायनिक उर्वरकों की पूर्ति में दिक्कत हो रही है और खरीफ की खेती प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। राज्य में रासायनिक उर्वरकों की प्रदायक कम्पनियों को छत्तीसगढ़ राज्य को मांग कोटे अनुसार खाद की आपूर्ति के लिए लगातार निर्देशित किया जा रहा है।

कृषि संचालनालय छत्तीसगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2021 सीजन के लिए केेन्द्र सरकार को 11.75 लाख मेट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति के लिए डिमांड भेजी गई थी, जिसमें यूरिया की मात्रा 5.50 लाख टन, डीएपी 3.20 लाख टन, एनपीके 80 हजार मेट्रिक टन, एमओपी 75 हजार मेट्रिक टन, सिंगल सुपरफॉस्फेट 1.50 लाख मेट्रिक टन शामिल है। अपर संचालक कृषि ने बताया कि 7 जुलाई की स्थिति में रासायनिक उर्वरक निर्माता कम्पनियों द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को 5.50 लाख टन यूरिया की मांग के विरूद्ध 2.32 लाख टन यूरिया की आपूर्ति की गई है, जो मात्र 42 फीसद है। इसी तरह डीएपी खाद की 3.20 लाख मेट्रिक टन मांग के विरूद्ध अब तक 1.21 लाख टन खाद प्रदाय की गई है, जो कि मांग का मात्र 38 प्रतिशत है। एनपीके उर्वरक की 80 हजार मेट्रिक टन की मांग के बदले अब तक छत्तीसगढ़ राज्य के मात्र 48 हजार मेट्रिक टन तथा एमओपी उर्वरक 75 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध 45 हजार मेट्रिक टन की आपूर्ति की गई है, जो कि एनपीके और एमओपी उर्वरक की मांग का मात्र 60 प्रतिशत है। अपर संचालक ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 1.50 लाख मेट्रिक टन सिंगल सुपरफॉस्फेट के मांग के विरूद्ध अब तक 80 हजार मेट्रिक टन उर्वरक ही मिला है, जो कि मांग का मात्र 54 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि उर्वरक प्रदायक कम्पनियों समन्वय कर छत्तीसगढ़ राज्य के कोटे के उर्वरक की शेष मात्रा की आपूर्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है।

अपर संचालक कृषि ने बताया कि इस साल खरीफ सीजन के लिए राज्य को प्राप्त रासायनिक उर्वरकों की मात्रा बीते 6 सालों में मिले रासायनिक उर्वरकों की मात्रा की तुलना में लगभग आधी है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन 2015 में उर्वरक प्रदायक कम्पनियों द्वारा राज्य की डिमांड 11 लाख मेट्रिक टन के विरुद्ध 9.81 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों की आपूर्ति की गई थी, जो कि डिमांड का 89 प्रतिशत थी। इसी तरह खरीफ 2016 सीजन में 10.40 लाख मेट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की डिमांड के 8.25 लाख मेट्रिक टन उर्वरक प्रदाय किया गया था, जो डिमांड का 79 प्रतिशत था। खरीफ सीजन 2017 में उर्वरकों की मांग का 72 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2018 मांग का 73 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2019 में मांग का 80 प्रतिशत तथा खरीफ सीजन 2020 में 11.30 लाख मेट्रिक टन की मांग के विरूद्ध छत्तीसगढ़ राज्य को 10.04 लाख मेट्रिक टन उर्वरक मिला था, जो कि मांग का 89 प्रतिशत था। चालू खरीफ सीजन 2021 में राज्य की 11.75 लाख टन रासायनिक उर्वरक की मांग के विरूद्ध अब तक केन्द्र सरकार द्वारा मात्र 5.26 लाख मेट्रिक टन उर्वरक की प्रदाय किया गया है, जो कि मांग का मात्र 45 प्रतिशत है। रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में कमी के चलते राज्य में रासायनिक उर्वरकों का संकट बना हुआ है।

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