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चीन की UN में ‘कश्मीर चर्चा’ चाल हुई फेल

By @dmin Published December 18, 2019
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न्यू यॉर्क,कश्मीर की स्थिति पर चीन ने यूनाइटेड नेशंस सिक्यॉरिटी काउंसिल (यूएनएससी) में बंद कमरे में चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा था। सिक्यॉरिटी काउंसिल के सदस्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के विरोध के बाद चीन ने अपने इस प्रस्ताव को वापस ले लिया है। दिसंबर में यूएनएससी के अध्यक्ष बने अमेरिका ने चीन के समर्थन वाला प्रस्ताव रोकने की अगुवाई की। वहीं, फ्रांस ने कहा कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है।

भारत ने इस मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। आधिकारिक सूत्रों ने कहा, ‘भारत सिक्यॉरिटी काउंसिल का समदस्य नहीं है, इसलिए वह चर्चा में शामिल नहीं है।’ फ्रांस के एक डिप्लोमैटिक सूत्र ने बताया, ‘हमारी पोजिशन बिल्कुल साफ है। कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय रूप से ही देखना होगा। हमने हाल में न्यू यॉर्क सहित कई अवसरों पर यह बात कही है।’

भारत के समर्थन में आया ब्रिटेन
यूएनएससी में इस मुद्दे पर ब्रिटेन ने पहली बार भारत का साथ खुले तौर पर दिया है, वहीं यूएनएससी के एक अन्य स्थायी सदस्य रूस ने कहा कि फोरम में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। रूस का कहना था कि अजेंडा में दूसरे अहम वैश्विक मुद्दे होने चाहिए। 15 सदस्यों वाली यूएनएससी में शामिल इंडोनेशिया ने इस बात पर ऐतराज जताया कि लाइन ऑफ कंट्रोल के भारतीय क्षेत्र की ओर सुरक्षा बलों के जमावड़े को चर्चा का आधार क्यों बनाया जा रहा है। इंडोनेशिया ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है।

एक सूत्र ने बताया कि सीमा के मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आने वाले हैं और चीन ने इससे पहले दबाव बनाने के लिए कश्मीर का प्रस्ताव बढ़ाया। जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत सरकार के निर्णय के बाद जारी किए गए मानचित्र को देखते हुए चीन चर्चा कराना चाहता था।

भारत पर दबाव बनाना चाहता था चीन
घटनाक्रम से वाकिफ एक शख्स ने बताया, ‘अवकाश के कारण सुरक्षा परिषद में कामकाज बंद रहने वाला है। साथ ही, भारत की अमेरिका से 2+2 वार्ता बुधवार से शुरू होने वाली है और विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के लिए 21 दिसंबर को वांग यी भारत आने वाले हैं। ऐसे में यूएनएससी में बंद कमरे में चर्चा पर जोर देने का मकसद केवल यह था कि सीमा मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव बनाया जाए।’ एक अन्य सूत्र ने कहा कि चीन यह दिखाकर भारत पर दबाव बनाना चाहता था कि सिक्योरिटी काउंसिल में भारत-पाकिस्तान अजेंडा और भारत-चीन सीमा मुद्दा है।

21 दिसंबर को विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत मोदी सरकार के दोबारा बनने के बाद से दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर है। मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत बढ़ाने का निर्णय किया गया था ताकि लाइन ऑफ कंट्रोल पर स्थिति साफ की जा सके।

रिपब्लिकन सांसद ने कश्मीर पर भारत किया भारत का समर्थन
अमेरिकी कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने कश्मीर पर भारत के कदमों का समर्थन किया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद फ्रांसिस रूनी ने कहा कि ‘भारत अमेरिका का अहम सहयोगी है। हमें कश्मीर पर उसके रुख का समर्थन करना चाहिए।’ रूनी ने सोमवार को एक ब्लॉग में लिखा, ‘कश्मीर में तीन दावेदारों के बीच भारत का दावा सबसे विश्वसनीय है। ब्रिटिश शासन खत्म होने पर 1950 के दशक में जम्मू कश्मीर के करीब दो तिहाई हिस्से ने भारत के साथ रहने का निर्णय किया था। इस राज्य को विशेष प्रशासनिक दर्जा दियागया था और आंतरिक प्रशासनिक निर्णयों में स्वायत्तता दी गई थी। बाद के वर्षों में जम्मू एवं कश्मीर की राज्य सरकार का भारत की केंद्रीय सरकार के साथ संबंध मजबूत होगा ।

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