रायपुर। कांग्रेस आलाकमान छत्तीसगढ की राजनीति में पंजाबी तड़का लगाने जा रही है। खबर है कि जिस तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह व नवजोत सिंह सिद्धू के बीच के विवाद का मध्य-मार्ग निकाला गया, ठीक उसी तर्•ा पर छत्तीसगढ में भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व स्वास्थ्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बीच नया रास्ता तलाशा जा रहा है। हालांकि पंजाब की तर्•ा पर संगठन की बागडोर की बजाए सत्ता में अधिकारों पर ज्यादा जोर है।

उल्लेखनीय है कि हाईकमान के बुलावे पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल शाम दिल्ली रवाना हुए थे। वहीं स्वास्थ्यमंत्री टीएस सिंहदेव पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं। भूपेश बघेल सरकार ने इस साल अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा किया है। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बघेल के साथ होने वाली बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पद के बंटवारे के फॉम्र्यूले पर चर्चा हो सकती है। राज्य में दिसंबर 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद बघेल और वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे।
राज्य में नई सरकार के गठन के बाद से ही मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई वर्ष के फॉम्र्यूले की चर्चा शुरू हो गई थी। जब 17 दिसंबर वर्ष 2018 को बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब सिंहदेव और साहू ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। राज्य में तब से चर्चा है कि बघेल और सिंहदेव के बीच ढाई-ढाई वर्ष मुख्यमंत्री पद के लिए सहमति बनी है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान या दोनों में से किसी नेता ने इसकी कभी पुष्टि नहीं की है।
इससे पहले राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कथित फॉम्र्यूले को लेकर मुख्यमंत्री बघेल से सवाल किया गया था तब उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी आलाकमान आदेश देगा तो वे पद छोड़ देंगे। सिंहदेव इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में थे और उन्होंने कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी की थी। इधर, राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कथित फॉम्र्यूले की चर्चा के बीच वरिष्ठ नेताओं के बीच तल्खी भी देखी जा रही है। बीते 27 जुलाई को जब छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा था, तब सिंहदेव ने यह कहते हुए सदन छोड़ दिया था कि वह कार्यवाही में तब तक शामिल नहीं होंगे जब तक राज्य सरकार एक विधायक द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं देती है।
कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके काफिले पर सरगुजा जिले में सिंहदेव के इशारे पर हमला किया गया था। उन्होंने मंत्री से जान को खतरा होने का भी आरोप लगाया था। बाद में जब सरकार ने सिंहदेव पर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया और विधायक सिंह ने खेद जताया, तब सिंहदेव विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए।
राहुल हुए सक्रिय, पूनिया की मौजूदगी में होगी बैठक
कांग्रेस शासित राज्यों में उठ रहे नित नए विरोध के स्वरों के बाद राहुल गांधी सक्रिय हो गए हैं। पंजाब का विवाद सुलझाने के बाद अब उन्होंने छत्तीसगढ़ की ओर रूख किया है। आज होने जा रही बैठक में न केवल सीएम बघेल व टीएस सिंहदेव अपितु कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पूनिया भी मौजूद रहेंगे। बघेल और सिंहदेव के बीच विवाद की खबरें नई नहीं हैं, लेकिन पिछले एक-डेढ़ महीने से सिंहदेव के तेवर लगातार तल्ख बने हुए हैं। अगस्त महीने में वे कई बार दिल्ली का दौरा भी कर चुके हैं।
जता चुके हैं सरकार के फैसलों से सहमति
सिंहदेव कई बार राज्य सरकार के फैसलों के प्रति खुलेआम असहमति जता चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइवेट अस्पतालों को सरकारी अनुदान देने के फैसले पर उन्होंने आपत्ति जताई थी और कहा था कि स्वास्थ्य मंत्री होने के बावजूद इस मामले में उनसे कोई चर्चा नहीं की गई। दोनों नेताओं के बीच विवाद का असली कारण मुख्यमंत्री के कुर्सी के लिए ढाई-ढाई साल का कथित फॉम्र्यूला है। न तो कांग्रेस आलाकमान और न ही सिंहदेव ने कभी खुलकर कहा कि इस तरह का कोई फॉम्र्यूला है, लेकिन सिंहदेव के समर्थक अक्सर इसकी चर्चा करते रहते हैं।




