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भारतीय स्टील सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार… उत्पादन, निर्यात और ग्रीन स्टील मिशन से मजबूत हुई भारत की पहचान

By Mohan Rao Published May 8, 2026
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रायपुर (पीआईबी)। भारत का स्टील क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उत्पादन क्षमता, घरेलू खपत, निर्यात और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रगति ने भारत को वैश्विक इस्पात उद्योग में मजबूत स्थिति दिलाई है। वर्ष 2018 से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील उत्पादक देश के रूप में कायम भारत अब विशेष स्टील (स्पेशलिटी स्टील) और हरित इस्पात उत्पादन में भी नई पहचान बना रहा है।

सरकार की नीतिगत सहायता, पीएलआई योजना, लॉजिस्टिक्स सुधार और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाली पहलें इस परिवर्तन की प्रमुख आधार बन रही हैं। भारत की कच्चे स्टील उत्पादन में वैश्विक हिस्सेदारी 2014 में 5.2 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 7.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं, देश में फिनिश्ड स्टील की खपत पिछले 12 वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़कर 163.7 मिलियन टन हो गई है। विशेषज्ञ इसे देश में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरीकरण और औद्योगिक विकास का संकेत मान रहे हैं।

2047 तक 500 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2047 तक 500 मिलियन टन स्टील उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। राष्ट्रीय स्टील नीति 2017 के तहत 2030-31 तक 300 मिलियन टन क्षमता और 255 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से लगभग 66 प्रतिशत लक्ष्य अभी ही हासिल किया जा चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कच्चा स्टील उत्पादन 168.4 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड वृद्धि मानी जा रही है। वहीं फिनिश्ड स्टील उत्पादन 160.9 मिलियन टन और खपत 163.7 मिलियन टन दर्ज की गई।

निर्यात बढ़ा, आयात घटा
भारतीय स्टील उद्योग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में निर्यात वृद्धि और आयात में कमी को माना जा रहा है। मार्च 2026 में स्टील निर्यात में 29.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि आयात 9.5 प्रतिशत घटा। फिनिश्ड स्टील निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 35.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वियतनाम, बेल्जियम और ताइवान भारत के प्रमुख निर्यात बाजार बनकर उभरे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ने के साथ भारत की वैश्विक स्टील सप्लाई चेन में स्थिति मजबूत हुई है।

पीएलआई योजना से स्पेशलिटी स्टील को मिला बढ़ावा
सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना स्टील सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है। स्पेशलिटी स्टील के लिए शुरू की गई योजना के तहत अब तक 23,022 करोड़ रुपये का निवेश साकार हुआ है। इस योजना के माध्यम से 24 लाख टन स्पेशलिटी स्टील उत्पादन, 13 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार, 24 मिलियन टन नई उत्पादन क्षमता और 6 हजार करोड़ रुपये का आयात प्रतिस्थापन जैसी उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। सरकार ने नवंबर 2025 में पीएलआई 1.2 चरण भी शुरू किया, जिसमें 55 कंपनियों की 85 परियोजनाओं के लिए समझौते किए गए हैं।

ग्रीन स्टील और नेट-जीरो पर फोकस
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए स्टील उद्योग में डी-कार्बोनाइजेशन और ग्रीन स्टील उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी लागू की। इसके तहत ऐसे स्टील संयंत्रों को ग्रीन स्टील श्रेणी में रखा गया है, जिनका कार्बन उत्सर्जन प्रति टन फिनिश्ड स्टील पर 2.2 टन सीओ₂ से कम है। मार्च 2026 तक 89 स्टील इकाइयों को ग्रीन स्टील प्रमाणन दिया जा चुका है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्टील सेक्टर में हाइड्रोजन आधारित तकनीकों पर पायलट परियोजनाएं शुरू की गई हैं। वहीं, कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) तकनीक को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में 20 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान का प्रस्ताव रखा गया है।

भिलाई और नगरनार जैसे स्टील हब को मिलेगा फायदा
देश के प्रमुख स्टील जोन में भिलाई, रायपुर और नगरनार जैसे छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल हैं। सरकार इन स्टील जोन में रेल, सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं चला रही है। पीएम गतिशक्ति मास्टरप्लान के तहत 2100 से अधिक स्टील इकाइयों का डेटा प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया है, जिससे उत्पादन और वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।

एआई और नई तकनीकों की एंट्री
स्टील मंत्रालय ने “स्टील पवेलियन इन एआई” जैसी पहल शुरू की है, जिसके माध्यम से उद्योग की समस्याओं को एआई आधारित समाधान देने की कोशिश की जा रही है। इसमें उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतियों, बढ़ती घरेलू मांग, तकनीकी नवाचार और हरित ऊर्जा की दिशा में उठाए जा रहे कदमों से भारत का स्टील सेक्टर आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

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