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आईआईटी भिलाई के फैकल्टी को इनोवेटिव रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए मिला पीएमईसीआरजी सम्मान

By Mohan Rao Published May 8, 2026
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भिलाई। आईआईटी भिलाई ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत उसके पाँच फैकल्टी सदस्यों को प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री अर्ली करियर रिसर्च ग्रांट (पीएमईसीआरजी) मिला है। डॉ. कृष्ण मुरारी असिस्टेंट प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, डॉ. कचाला नानाजी असिस्टेंट प्रोफेसर, रसायन विज्ञान विभाग और एडजंक्ट फैकल्टी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, डॉ. सैकत साहू असिस्टेंट प्रोफेसर, मेकाट्रॉनिक्स विभाग, डॉ. नितिन बी असिस्टेंट प्रोफेसर, सामग्री विज्ञान और धातुकर्म इंजीनियरिंग विभाग और डॉ. अविजित साहा असिस्टेंट प्रोफेसर, भौतिकी विभाग को वर्ष 2025-26 के लिए यह प्रतिस्पर्धी ग्रांट प्राप्त हुआ है।

प्रधानमंत्री अर्ली करियर रिसर्च ग्रांट (पीएमईसीआरजी) भारत में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की एक प्रतिष्ठित पहल है। यह ग्रांट, जो 3 वर्षों की अवधि के लिए दिया जाता है, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास करने वाले शुरुआती करियर के शोधकर्ताओं को प्रदान किया जाता है। इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, लचीली फंडिंग उपलब्ध कराना और एक सुदृढ़ अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

डॉ. मुरारी के प्रोजेक्ट हाइब्रिड एसी-डीसी वितरण नेटवर्क के लिए उन्नत कम्प्यूटेशन और वितरित नियंत्रण ढाँचा का उद्देश्य हाइब्रिड एसी-डीसी वितरण नेटवर्क के विश्लेषण, अनुकूलन और नियंत्रण के लिए एक उन्नत ढाँचा विकसित करना है।  डॉ. नानाजी का प्रोजेक्ट उच्च-वोल्टेज, टिकाऊ लिथियम-आयन बैटरी निर्माण के लिए एक स्केलेबल मार्ग स्थापित करने हेतु बॉल-मिल्ड नैनो-एलएमएफपी को ड्राई इलेक्ट्रोड तकनीक के साथ एकीकृत करना।  बॉल-मिल्ड नैनो-एलएमएफपी कैथोड पाउडर के संश्लेषण के लिए एक स्केलेबल मार्ग पर काम करने से संबंधित है, जिसके बाद उच्च-वोल्टेज और टिकाऊ लिथियम-आयन बैटरियों के लिए ड्राई इलेक्ट्रोड का निर्माण किया जाएगा।

डॉ. साहू का शोध सीढ़ीदार खेती में चोट से बचाव और दक्षता बढ़ाने के लिए एक हाइब्रिड बैक-सपोर्ट एक्सोस्केलेटन का विकासष् एक नवीन हाइब्रिड पहनने योग्य एक्सोस्केलेटन विकसित करने में विशेषज्ञता रखता है। यह एक्सोस्केलेटन सक्रिय और निष्क्रिय, दोनों तरह के तंत्रों को एकीकृत करता है, ताकि ऐसे कठिन वातावरण में काम करने वाले किसानों की सहायता की जा सके।

डॉ. नितिन का प्रोजेक्ट बेहतर उच्च-तापमान प्रदर्शन और हाइड्रोजन एम्ब्रिटलमेंट प्रतिरोध के लिए उन्नत बहु-चरण संरचनात्मक मिश्र धातुओं का विकासष् कम्प्यूटेशनल मिश्र धातु डिजाइन तकनीकों और सूक्ष्म-संरचना इंजीनियरिंग का उपयोग करके एक नई बहु-चरण मिश्र धातु के डिजाइन और विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य हाइड्रोजन को सुरक्षित रूप से फँसाना और हाइड्रोजन एम्ब्रिटलमेंट (हाइड्रोजन के कारण धातु का भंगुर होना) को रोकना है। यह शोध सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का समर्थन करता है, जिससे एक सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय हाइड्रोजन बुनियादी ढाँचे के निर्माण में योगदान मिलता है।

डॉ. साहा का कार्य और बायोइमेजिंग के लिए पर्यावरण-अनुकूल क्वांटम नैनोमटेरियल उत्सर्जक नए पर्यावरण-अनुकूल, शॉर्टवेव इन्फ्रारेड-सक्रिय क्वांटम डॉट्स विकसित करने और एसडब्ल्यूआईआर लाइट एमिटिंग डायोड तथा बायोइमेजिंग के क्षेत्र में उनके अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने पर केंद्रित है। यह प्रतिष्ठित ग्रांट आईआईटी भिलाई के फैकल्टी सदस्यों को उनके अत्याधुनिक शोध को आगे बढ़ाने के लिए बेहतरीन सहयोग प्रदान करती है। आईआईटी भिलाई इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए इन सभी युवा और प्रतिभाशाली फैकल्टी सदस्यों को हार्दिक बधाई देता है।

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