भिलाई। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड के सैकड़ों श्रमिकों पर रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। प्रमुख नियोक्ता होने के बाद भी भिलाई स्टील प्लांट द्वारा एफएसएनएल को काम देने के बजाय ग्लोबल टेंडर निकाला गया। चार टुकड़ों में निकाले गए इस टेंडर के कारण एफएसएनएल के हिस्से में जो काम आया वह यहां कार्यरत 800 से ज्यादा श्रमिकों के लिए पर्याप्त नहीं है। भिलाई इस्पात संयंत्र की इस नीति के खिलाफ FSNL बचाओ संघर्ष समिति मोर्चा खोला गया है। समिति के बैनर तले मुर्गाचौक सेक्टर-1 पर 30 मार्च को हड़ताल होगी जिसमें सभी प्रभावित श्रमिक शामिल हो रहे हैं।

इस संबंध में संयोजक मंडल के सदस्य गजेन्द्र सिंह, राजु लाल श्रेष्ठ, एव अरुण सिंह सिसोदिया ने शनिवार को संयुक्त पत्रकार वार्ता में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि FSNL पूर्व में भारत सरकार का उपक्रम था। जो विनिवेश निति के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा षड़यंत्र के तहत निजीकरण करते हुए जापानी कंपनी कोनोइके ट्रांसपोर्ट कंपनी को 320 करोड़ में दे दिया जबकि FSNL का मार्केट वैल्यू 1000 करोड़ से भी अधिक था । हाल के दिनों में स्क्रैप माफियो द्वारा FSNL को कमजोर करने तथा समाप्त करने के लिए षड़यंत्र रचा जा रहा था। FSNL को मिलने वाले सभी टेंडर पहले एक पार्टी के सिद्धांत पर आधारित थे। जिसे ओपन टेंडर में परिवर्तित किया गया था। ओपन टेंडर के कारण 750 करोड़ का टेंडर चार भागों में बांटा गया।
संयोजक मंडल के सदस्यों ने बताया कि FSNL 1979 से 1983 तक सेल का साझेदारी कंपनी थी तथा इस्पात मंत्रालय को MSTC में शेयर ट्रांसफर किये गए जो की 60% व 40% था । उसके पश्चात 100% MSTC को सेल को ट्रांसफर किया गया | FSNL पिछले 40 वर्षो से इस्पात उद्योग में स्लैग एव स्क्रैप प्रोसेसिंग मैग्नेटिक सेपरेटर का निष्पादन करता हैं। जिससे इस्पात मंत्रालय के हजारो करोड़ का शुद्ध लाभ होता हैं। कारखाना अधिनियम 1948 के अंतर्गत बीएसपी सयंत्र प्रमुख नियोक्ता की भूमिका में हैं तथा नियोक्ता के रूप में FSNL ने श्रम विभाग से लेबर लाइसेंस प्राप्त किया हैं। इसलिए प्रमुख नियोक्ता बीएसपी तथा नियोक्ता FSNL की सयुक्त जिम्मेदारी बनती हैं कि संस्थान में कार्यरत सभी नियमित तथा ठेका श्रमिको की नौकरी, सेवाए सुनिषित करे तथा उनके वेतनमान एव सेवा शर्तों में कोई परिवर्तन न किया जाये ।
संयोजक मंडल के सदस्यों ने बताया कि जो टेंडर जनवरी में हुए हैं उक्त टेंडर में कारखाने में कार्यरत नियमित एव ठेका श्रमिको के नौकरी तथा सेवा शर्तों के सबंध में कोई उल्लेख नहीं हैं। जबकि उक्त कार्य स्थाई प्रकृति का हैं इसलिए कार्य में नियोजित ठेका श्रमिको को ठेका संविदा उन्मूलन अधिनियम 1970 केन्द्रीय नियम 71 की धारा 10 के अनुसार विभागीय कारण किया जाना चाहिए। कोई भी ठेकदार बदलने की स्थिती में उन्हें स्थाई उसी स्थान पर उनके पुराने वरिष्ठता सुनिश्चित करते हुए उसी स्थान पर उन्हें नियमित सेवारत किया जाना चाहिए ।
संयोजक मंडल के सदस्यों ने कहा है कि हमारी मांग है नये टेंडर से श्रमिको की सेवा निरंतर रहे तथा उनके वेतनमान तथा उनके सेवा शर्तों पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। ठेका क्रमांक 872 व स्थायी 373 हैं। ठेकेदार बदलने के कारण किसी भी ठेका श्रमिक, स्थायी श्रमिक की छटनी न किया जाए तथा न कही स्थानांतरण किया जाये। सभी ठेका श्रमिको को नए वेज-कोड के आधार पर नियुक्त पत्र दिया जाये। केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन की भुगतान सुनिश्चित किया जाये । सभी श्रनिको को वेतन पर्ची, कानून छुट्टी जैसे EL,CL राष्ट्रीय अवकाश दिया जाए।




