सुकमा। छ्त्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 29 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। सरकार के सामने हथियार डाल दिए हैं। ये सभी नक्सली पिछले कई सालों से नक्सल संगठन के साथ जुड़कर काम कर रहे थे। वहीं हिंसा छोड़ने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। सरेंडर के बाद सीएम साय का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि हिंसा नहीं विकास ही भविष्य है।
सुकमा के SP किरण चव्हाण ने बताया कि 29 कैडर सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौट आए हैं। सभी माओवादी दरभा डिवीजन अंतर्गत केरलापाल एरिया कमेटी में सक्रिय रहे हैं। ये सभी नक्सली सुकमा के गोगुंडा इलाके में सक्रिय थे। इनमें से एक पोड़ियाम बुधरा नक्सल संगठन में DAKMS अध्यक्ष था। इसपर 2 लाख रुपए का इनाम घोषित है। इसके अलावा जन मिलिशिया कैडर्स के नक्सलियों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ा है। सरेंडर करने के बाद सभी सरकार के साथ जुड़कर काम करना चाहते हैं।
केरलपाल एरिया कमेटी नक्सल-मुक्त होने के करीब
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद, केरलपाल एरिया कमेटी अब नक्सल-मुक्त होने के अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह सुकमा जिले के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की राह प्रशस्त करेगी। सुरक्षा बल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि नक्सल विरोधी अभियान इसी तरह जारी रहे, ताकि क्षेत्र में विकास और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा और स्थिरता का प्रमाण – मुख्यमंत्री साय
सरेंडर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि उस भरोसे, सुरक्षा और स्थिरता का प्रमाण है जो अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लौट रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जहाँ कभी भय, दबाव और असुरक्षा का वातावरण था, वहां अब सुरक्षा शिविरों की सशक्त मौजूदगी, प्रशासन की सक्रियता और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच से हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुकमा और उसके आसपास के इलाकों में विकास कार्य, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं।
सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगी सरकार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि “जो हिंसा छोड़कर संविधान और विकास का रास्ता चुनेगा, उसके लिए सरकार सम्मानजनक जीवन, अवसर और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगी।” सरकार का उद्देश्य केवल हिंसा को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लौटाकर उन्हें एक नई पहचान और नया जीवन देना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 29 युवाओं का मुख्यधारा में लौटना यह साबित करता है कि अब छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में डर की जगह भरोसा और अंधेरे की जगह उम्मीद ने ले ली है।
संवाद, विकास और पुनर्वास को प्राथमिकता
यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि उस संवेदनशील शासन व्यवस्था का परिणाम है जो संवाद, विकास और पुनर्वास को प्राथमिकता देती है। राज्य सरकार ने पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि भटकाव छोड़ने वाले युवाओं को समाज में सम्मान, स्थिरता और आत्मनिर्भरता मिले। छत्तीसगढ़ आज स्पष्ट रूप से यह संदेश दे रहा है कि हिंसा नहीं, विकास ही भविष्य है।




