-दीपक रंजन दास
कहा तो यह जाता है कि नग्नता पश्चिम से आई पर देसी न्याय व्यवस्था को देखकर सहसा इसपर यकीन करना मुश्किल है। जरा-जरा सी बात पर लोगों को निर्वस्त्र कर गांव में घुमा दिया जाता है। वैसे कामुक मिथुन मूर्तियां हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रही हैं। इनका अन्यत्र उदाहरण दुर्लभ है। आध्यात्म के चरम तक पहुंची भारतीय सभ्यता में इसके भी गूढ़ अर्थ होते होंगे पर हम यहां उन परम्पराओं की चर्चा कर रहे हैं जो अब तक जीवित हैं। कोंडागांव/फरसगांव इलाके में एक गांव है-उड़न्दाबेड़ा। यहां एक ब्याहता ने अपने पति को उसकी प्रेमिका के साथ बात करते देख लिया। उसने पूरा गांव इक_ा कर लिया। उन लोगों ने पहले दोनों को पकड़ कर खूब पीटा। इससे भी मन नहीं भरा तो उन्हें निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाया। वे हाथों से अपने गोपनीय अंगों को छिपाने लगे तो दोनों के हाथ डंडे से क्रुस की तरह बांध दिये गये। पूरा गांव तमाशबीन बना रहा। कुछ लोगों ने इसका वीडियो शूट कर लिया और उसे वायरल भी कर दिया। मामला पुलिस के पास पहुंचा तो ब्याहता के साथ ही ग्राम के सरपंच और पटेल सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह इस तरह की कोई पहली घटना नहीं है। महिलाओं के मामले में देसी दंड विधान कुछ विकृत सा है। मुंह काला करना, निर्वस्त्र कर गांव में घुमाना, सामूहिक बलात्कार करना, टोनही करार देकर नोचना खसोटना। ऐसी घटनाएं आखिर क्या दर्शाती हैं? आध्यात्म का तो पता नहीं पर कामुकता और परपीड़ा हममें से अधिकांश को आज भी आल्हादित करती है। हम प्रेमी युगलों को ऐसा सबक सिखाना चाहते हैं कि उसके बाद न वो जी सकें और न मर सकें। वैसे कुछ राज्यों में प्रेम की सजा बलात्कार और फांसी भी है।





