पहले कोरोना, फिर कांग्रेस ने रोक दी विकास की रफ्तार
भिलाई। प्रदेश में सरकार बदलते ही भाजपा नेतृत्व वाले वार्डों में विकास की रफ्तार थम गई। भाजपा के पार्षद कुछ कर पाते, इससे पहले ही विश्वव्यापी महामारी कोरोना ने दस्तक दे दी। लाकडाउन के चलते पूरे देश की तरह भिलाई में काम-धंधे ठप्प पड़े और इसका सीधा असर वार्डों के विकास पर पड़ा। जो कार्य चल रहे थे, उन्हें प्रदेश की सरकार ने रूकवा दिया। ठेकेदारों को भुगतान रोक दिया गया। नतीजतन विकास जहां का तहां थम गया। अब भिलाई के लोगों में उम्मीद जगी है कि सिकुड़ती कोरोना महामारी के बीच सम्पन्न होने जा रहे नगर निगम चुनावों के बाद विकास एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा। जाहिर है कि इसके लिए निर्वाचित पार्षद का दमदार होना जरूरी है, ताकि नगर निगम यदि विकास के लिए राशि स्वीकृत न भी करे तो शासन स्तर पर पहल कर विकास मद से राशि लाई जा सके। ऐसे ही दमदार पार्षदों में एक नाम रिकेश सेन का है। रिकेश पिछली बार भी महापौर पद के दावेदार थे और इस बार भी हैं। उनके वार्ड रामनगर में भी विकास कार्य ठप्प पड़े हैं, लेकिन स्थानीय नागरिकों को भरोसा है कि निगम चुनाव के बाद हालात बदलेंगे। रिकेश सेन विकास का अलख जगाएंगे और क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करेंगे।

करीब 5000 मतदाताओं वाले रामनगर वार्ड से भाजपा ने इस बार भी रिकेश सेन को अपना प्रत्याशी बनाया है। नगर निगम की पिछली परिषद में रिकेश भाजपा पार्षद दल के नेता थे। सदन में उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा और नेता प्रतिपक्ष के दायित्व का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन किया। हालांकि पिछले 3 साल का अनुभव अन्य पार्षदों की तरह उनके लिए भी पीड़ादायक रहा। उनके वार्ड में चल रहे दर्जनों विकास के काम ठप्प पड़ गए। जब तक प्रदेश में भाजपा की सरकार रही, वरिष्ठ पार्षद रायपुर जाकर विकास राशि स्वीकृत करा लाते थे। रिकेश भी यही करते रहे, किन्तु 2018 में प्रदेश में सरकार बदलने के बाद स्थितियों में भी व्यापक बदलाव आया। अब नगर निगम में भी कांग्रेस का शासन था और प्रदेश की सत्ता पर भी। यह भाजपा के पार्षदों पर दोहरी मार की तरह था। हालांकि बावजूद इसके रिकेश सेन जैसे कई पार्षद रायपुर जाकर विकास राशि स्वीकृत कराने में कामयाब रहे, किन्तु इसी दौरान कोरोना महामारी ने दस्तक दी और न केवल रामनगर वार्ड अपितु पूरे शहर और प्रदेश की दशा ही बदल गई।
कोरोना के चलते पूरे राज्य का विकास अवरूद्ध हुआ तो इससे भाजपाई नेतृत्व वाले वार्ड कैसे अछूते रह पाते। इस कठिन दौर में भी रिकेश ने अपने नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं को अवरूद्ध नहीं होने दिया। नागरिकों की चिकित्सा सुविधा, शासकीय योजना के तहत मिलने वाले राशन, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति समेत कई ऐसे काम उन्होंने जमीन पर उतरकर करवाए, जो कोरोना महामारी के दौरान आवश्यक थे। कोरोना खतरा कम हुआ और विकास के काम प्रारम्भ हुए तो उन्हें यह पता चला कि उनके वार्ड के लिए स्वीकृत कार्यों को या तो पेंडिंग कर दिया गया है या फिर ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया है। जो कार्य करवाए जा सकते थे, उसकी राशि को कांग्रेसी वार्डों के विकास में लगा दिया गया। तब तक नगर निगम का पंचवर्षीय कार्यकाल खत्म हो चुका था। ऐसे में जो कार्य बचे या अधूरे रह गए उन्हें पूरा करने की उम्मीद अगले चुनाव पर टिक गई।
सारे अधूरे काम पूरे होंगे, विकास को मिलेगी रफ्तार
पिछले करीब 3 वर्षों से नगर निगम का कामकाज बुरी तरह प्रभावित है। निगम की पुरानी परिषद का कार्यकाल खत्म हुआ, किन्तु नए चुनाव का ऐलान होने में काफी वक्त लग गया। इससे पहले से ही पिछड़े वार्डों में विकास के काम रूक गए। अब रिकेश सेन चाहते हैं कि चुनाव नतीजों के बाद वे सारे कार्य प्राथमिकता के साथ सम्पन्न हों, जो या तो अधूरे रह गए या फिर शुरू ही नहीं हो पाए। रामनगर से भाजपा द्वारा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद रिकेश वार्ड के दौरे पर हैं और मतदाता उनसे पूछ रहे हैं कि अधूरे कामों का क्या हुआ? रिकेश सभी को आश्वस्त कर रहे हैं कि वार्ड का विकास एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा और ऐसी रफ्तार पकड़ेगा कि काम खत्म होने पर ही दम साधेगा।
इन कामों को करना है पूरा
रिकेश सेन के मुताबिक, उनके रामनगर वार्ड में काफी काम लम्बे समय से लंबित है। चुनाव खत्म होते ही वे सबसे पहले इन कामों को पूरा करवाएंगे। रिकेश बताते हैं, महारानी स्कूल से प्रताप लकड़ी टाल की सड़क के लिए 40 लाख का टेंडर हुआ था। सड़क आधी ही बन पाई। शासन ने ठेकेदार का भुगतान रोक दिया, जिससे सड़क का काम अधूरा रह गया। वहीं डोमशेड का स्ट्रक्चर खड़ा करना भी उनकी प्राथमिकता में है। फिलहाल यहां 3 शेड नहीं लग पाए हैं। इसके अलावा कई गलियों का सीमेंटीकरण व नाली निर्माण का काम अधूरा पड़ा है। सरकार को किसानों को कर्ज माफ करना था, इसलिए वार्डों के विकास की राशि रोक दी गई। रामनगर मुक्तिधाम स्थित नाले का विस्तारीकरण भी आवश्यक है। इसके लिए कई बार टेंडर हुआ, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने उनके वार्ड के लिए स्वीकृत राशि को टाउनशिप के वार्डों में लगा दिया। कमोबेश ऐसी ही स्थिति रामनगर मुक्तिधाम मुख्य मार्ग की भी रही। इस मार्ग में 80 लाख रूपए की डामरीकृत सड़क का निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था, किन्तु इस काम को भी रोककर सेक्टर-5 में गार्डन का निर्माण करवा दिया गया। रिकेश ने वार्डवासियों को आश्वस्त किया कि चुनाव जीतने के बाद वे इन कार्यों को पूरा कराने में जी-जान लगा देंगे।
ऐसी सहृदयता…शाबास रिकेश..
करीब 60 साल की बुजुर्ग महिला पार्वती वर्मा शुगर से पीडि़त है। गरीबी के चलते समय रहते उनका इलाज नहीं हो पाया तो दोनों पैर खराब हो गए। चलने-फिरने में असमर्थ हो गई। दैनिक कार्य निवृत्ति के लिए भी दूसरों पर आश्रित हो गई। सारा दिन यह बुजुर्ग घर के बाहर बैठी रहती। आवश्यकता पडऩे पर पुत्र उक्त बुजुर्ग को गोद में उठाकर यहां-वहां लाता-ले जाता। इस बेहद गरीब परिवार ने शासन-प्रशासन स्तर पर काफी चक्कर लगाए कि शासकीय योजना के तहत उन्हें वाहन, ट्रायसाइकल या फिर चलने-फिरने के लिए कोई यंत्र मिल पाए। एक तो शारीरिक विकलांगता और उस पर शासकीय विभागों के बेपरवाह रवैय्ये ने पार्वती बाई का मनोबल तोड़ दिया। महिला का पुत्र मजदूर है।
शनिवार को जब रिकेश सेन वार्ड भ्रमण पर निकले तो उनकी नजर उक्त वृद्धा पर पड़ी। हाल-चाल पूछा तो सारी कहानी सामने आए। डबडबाई आंखों से बुजुर्ग महिला को एकटक निहारते हुए रिकेश ने तत्काल वॉकर मंगवाकर महिला को प्रदान किया। बुजुर्ग पार्वती बाई वर्मा ने रिकेश को खूब आशीषों के साथ जीत का आशीर्वाद भी दिया।
वार्ड भ्रमण के दौरान रिकेश के सामने इसी तरह का एक और मामला सामने आया। 14 साल की संगीता बंजारे के सिर पर हाथ रखकर जब रिकेश ने उससे उसकी शिक्षा के बारे में बात की तो पता चला कि इस बच्ची ने 8वीं तक की पढ़ाई की और इस साल उसने स्कूल में एडमिशन नहीं कराया है। इस पर रिकेश ने बच्ची को प्यारभरी डपट लगाई और शिक्षा का महत्व समझाया। उन्होंने तत्काल शासकीय स्कूल से फार्म मंगवाकर उसे जमा भी करवाया। रिकेश कहते हैं,- अब बच्ची की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी मेरी है। मैंने उसे पढ़ाने का जिम्मा ले लिया है।




