बड़े नेताओं के यहां जुटने लगी दावेदारों की भीड़
भिलाई। चुनाव प्रक्रिया का आगाज होने के साथ ही जिले के वरिष्ठ नेताओं के यहां टिकटार्थियों की भीड़ जुटने लगी है। दोनों दलों ने आज से ही प्रत्याशियों के नामों पर भी मंथन प्रारम्भ कर दिया है। खबर है कि हर वार्ड से आधा दर्जन से ज्यादा दावेदार सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में दावेदार सामने आने से नामों की छँटनी में नेताओं को दिक्कतें पेश आने वाली है। इस बार यह संभावना भी ज्यादा है कि कार्यकर्ताओं में टिकट न मिलने की नाराजगी गहराए, जिससे बागी प्रत्याशियों की संख्या बढ़े।

दुर्ग जिले के चार निकायों भिलाई, रिसाली, भिलाई-चरोदा नगर निगमों तथा जामुल पालिका क्षेत्र में चुनावी बिगूल फूंका जा चुका है। टिकट के लिए जोड़तोड़ भी शुरू हो गई है। बड़े-बड़े दिग्गज इस बार पार्षद चुनाव लडऩे की तैयारी में हैं। जिस दल के ज्यादा पार्षद होंगे, निकाय में उसकी सरकार बनेगी। दावेदारों ने निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना शुरू कर दिया है। आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके पूर्व दावेदारों ने निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना शुरू कर दिया है। अनापत्ति प्रमाण पत्र दावेदार तथा प्रस्तावक दोनों के लिए अनिवार्य है। इसके साथ ही दावेदार टिकट के लिए भी जोर लगा रहे हैं। भाजपा – कांग्रेस के सभी नेताओं के यहां टिकट को लेकर भीड़ जुट रही है।
इस बार पार्षदों को महापौर चुनना है। इसलिए भिलाई का महापौर कौन होगा, यह कह पाना मुश्किल है। कांग्रेस की बात करें तो टाउनशिप से लेकर खुर्सीपार क्षेत्र में विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व राज्यमंत्री बीडी कुरैशी का प्रभाव है। विधायक देवेंद्र ने बहुमत में आने का दावा तो किया है, पर कांग्रेस कितनी सीट जीत पाएगी, फिलहाल यह कह पाना मुश्किल है। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले वैशाली नगर में कांग्रेस के पूर्व विधायक भजन सिंह निरंकारी, पूर्व साडा उपाध्यक्ष बृजमोहन सिंह पर ज्यादा पार्षद जीताने का दारोमदार होगा। वहीं भाजपा की बात करे तो यहां सरोज पाण्डेय, विजय बघेल, प्रेमप्रकाश पाण्डेय तथा विद्यारतन भसीन समर्थकों के बीच टिकट को लेकर कड़ा संघर्ष होने की संभावना है। टिकट वितरण में गड़बड़ी हुई तो खामियाजा भाजपा को भुगतना पड सकता है। खुर्सीपार व टाउनशिप भी एक तरह से भाजपा का गढ़ है, पर यहां टिकट वितरण में किसकी चलेगी, जीत हार इस पर तय है। यहां भी कई दावेदार टिकट न मिलना की स्थित में बगावत का मूड़ बनाकर बैठे हैं।
रिसाली निगम नया बना है। यहां पहली बार चुनाव होना है। रिसाली निगम गृहमंत्री ताम्रध्वज की देन है। इस बात को बीते दो साल से जनता के दिमाग में डाला जा रहा है। रिसाली में सबकुछ पहले से तय है। इसलिए कांग्रेस में यहां बगावत के आसार कम है। इस निगम क्षेत्र में भाजपा की राष्ट्रीय नेत्री सरोज पाण्डेय का भी निवास है। इस लिहाज से उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी। हालांकि रिसाली निगम में भाजपा बैकफुट है, इसलिए यहां से कांग्रेस के लिए संभावनाएं ज्यादा है।
वहीं, भिलाई चरोदा बेहद संवेदनशील निगम है। इस निगम क्षेत्र में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा सांसद विजय बघेल का निवास स्थान है। पीएचई मंत्री रुद्र गुरु यहां के विधायक हैं। सांसद विजय बघेल का इस निकाय में खासा प्रभाव है। इसलिए टिकट के दावेदार उनके पास पहुंच रहे हैं, हालांकि संगठन में सरोज पाण्डेय समर्थकों का दबदबा है। सबसे अहम बात यहां आज तक कांग्रेस की शहर सरकार नहीं बनी है। बात अगर पार्षदों की करें तो यहां हमेशा कांग्रेस के पार्षद ज्यादा संख्या में जीतकर आते हैं। यदि इस बार भी यह समीकरण बैठा तो कांग्रेस की सत्ता आने की संभावना बन सकती है, पर इस निकाय में विजय बघेल की सक्रियता इसे चुनौती भी दे सकती है। यहां भी सब कुछ टिकट वितरण पर निर्भर है। जिस तरह से यहां के हर वार्ड में टिकट के लिए लंबी लाइन लगी है, उससे दोनों दलों को बगावत का डर भी सता रहा है।
जामुल नगर पालिका में दो बार कांग्रेस, एक बार निर्दलीय तथा एक बार भाजपा की सरकार रही है। अहिवारा विधायक व पीएचई मंत्री रुद्र गुरु पर इस क्षेत्र का दारोमदार है। भाजपा संगठन में सरोज पाण्डेय समर्थकों का कब्जा है, तो आम जनता व भाजपा कार्यकर्ताओं से सांसद विजय बघेल व पूर्व नपाध्यक्ष रेखराम बंछोर का सीधा प्रभाव है। कांग्रेस में टिकट को लेकर उतनी खेमेबाजी नहीं है, जितनी की भाजपा में है। बताया जा रहा है कि यहां कांग्रेस और भाजपा के बागियों को मिलाकर तीसरा पैनल भी गुप्त रुप से तैयार हो रहा है, जो जामुल के 24 वार्ड में प्रत्याशी खड़ा करेगा। हालांकि तीसरे पैनल की संभावना टिकट वितरण पर निर्भर है।




