भिलाई। भिलाई-चरोदा स्थानीय निकाय के लिए अब तक कुल 4 चुनाव हुए हैं, जिनमें से प्रारम्भिक दो चुनाव जहां निर्दलियों ने जीते, वहीं दो अन्य चुनाव के नतीजे भाजपा के पक्ष में गए। यह तब हुआ, जबकि कांग्रेस को वार्डों में बहुमत मिला था। पहले पालिकाध्यक्ष और फिर महापौर पद के लिए तरसती रही कांग्रेस को इस बार जीत के आसार नजर आ रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अब चरोदा का महापौर अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुना जाएगा।
बता दें कि भिलाई चरोदा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का निवास स्थान है। इस निकाय क्षेत्र का उरला वार्ड दुर्ग सांसद विजय बघेल का क्षेत्र भी है। वहीं रिसाली निगम क्षेत्र बनाने का श्रेय गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को जाता है। रिसाली निगम क्षेत्र में ही राज्यसभा सदस्य सरोज पाण्डेय का भी निवास है। लिहाजा इस बार चुनाव बेहद दिलचस्प होना है। भाजपा ने जिस तरह से प्रभारियों की नियुक्ति की है, उससे साफ है कि यह चुनाव बेहद जबरदस्त होने वाला है।
सन 2000 में भिलाई चरोदा नगर पालिका बना। तब से लेकर आज तक यहां चार चुनाव हो चुके हैं। इस चार चुनाव में कभी कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई। जबकि 2005 से यहां कांग्रेस के पार्षद ज्यादा संख्या में जीतकर आ रहे हैं। दरअसल पालिका अध्यक्ष व महापौर के प्रत्यक्ष चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को हार मिलती रही। सन 2000 के पहले चुनाव में कांग्रेस से बागवत कर विजय बघेल निर्दलीय चुनाव जीते थे। तब यहां कांग्रेस के श्यामाचरण बघेल दूसरे नंबर पर तथा भाजपा के संपत जैन तीसरे नंबर पर रहे थे। 2005 में फिर इतिहास दोहराया गया। विजय बघेल के चचेरे भाई शशिकांत बघेल ने कांग्रेस प्रत्याशी विजय जैन को हराकर 320 वोट से हराकर निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में भी कांग्रेस के पार्षद ज्यादा जीते।
2010 में भाजपा प्रत्याशी सीता साहू व कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमलता मढरिया के बीच सीधी टक्कर हुई थी। जिसमें सीता साहू ने पांच हजार वोट से जीत दर्ज की थी। अध्यक्ष पद कांग्रेस भले हारी, पर एक बार फिर पार्षद कांग्रेस के ही ज्यादा जीते। इसके बाद 2015 में भिलाई चरोदा पालिका को नगर निगम बना दिया गया। 2016 में यहां पहला चुनाव हुआ। सीधी टक्कर में भाजपा की चंद्रकांता मांडले से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति बंजारे 4200 वोटों से हार गई। इस चुनाव में भी कांग्रेस के पार्षद ज्यादा जीते। इसलिए कांग्रेस को इस बार महापौर की संभावना बनती दिख रही है। चूंकि भूपेश बघेल अब प्रदेश में सरकार के मुखिया हैं, लिहाजा उनकी प्रतिष्ठा इस चुनाव में लगी हुई है। इसलिए कांग्रेस यहां से ज्यादा से ज्यादा पार्षद जीताने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। कांग्रेस का पूरा फोकस मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा बचाने पर है। भिलाई चरोदा क्षेत्र में कुल 40 वार्ड है। ऐसे में पार्टी का प्राथमिक लक्ष्य 20 से ज्यादा सीटें जीतने का है। हालांकि कांग्रेस के कई नेता इससे कहीं ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।




