-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ पूरे देश को नवाचार का असली मतलब सिखा रहा है. छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने यह साबित कर दिया है कि नवाचार का मतलब हमेशा कुछ नया नहीं होता. कभी-कभी यह पुरातन को नए नजरिये से देखना भी होता है. नरवा-गरुआ-घुरवा-बारी योजना से देश का ध्यान खींचने वाले भूपेश बघेल की गौठान योजना भी अब रंग लाने लगी है. इसे आंकड़ों में समझें तो पिछले ढाई साल में गोठानों ने 40 करोड़ से ज्यादा का व्यापार किया है. इन गोठानों पर सरकार ने केवल 13 करोड़ रुपए लगाए थे. है, दुनिया में ऐसा कोई धंधा जो ढाई साल में मूल लौटा कर दो गुना लाभ दिला दे? एक तरफ जहां केन्द्र विश्वगुरू बनने की जुमलेबाजी में देश को उलझा रहा है वहीं छत्तीसगढ़ विश्व का न सही देश का गुरू तो बन ही गया है. टेक्नोलॉजी और आईटी की बातें करने वालों को तो यह कभी नहीं सूझता कि गोबर और गोमूत्र से भी न केवल कमाई हो सकती है बल्कि अच्छी सेहत भी मिल सकती है. मॉल और मार्ट में जो लोग “आर्गेनिक फूड” खरीदने के लिए मरे जाते थे, वो भी अब छत्तीसगढ़ मार्ट में फेरा लगा रहे हैं. हालांकि योजना अभी शैशवावस्था में है पर इसका पोटेंशियल दिखाई देने लगा है. अभी सिर्फ ढाई साल हुए हैं जिसमें 290 गोठान ही बन पाए हैं. इन गोठानों से महिला स्व-सहायता समूहों की 2500 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. ये वो महिलाएं हैं जिन्होंने निचट गरीबी देखी है. इनमें से बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने एक मुट्ठी चावल और दो रुपए की बचत से शुरुआत की थी. आज वे नया इतिहास लिख रही हैं. इन महिलाओं को गोबर तथा अन्य ईकोफ्रेंडली प्रोडक्ट के रूप में रोजगार मिला है. गौठान में अभी 32 से अधिक किस्म के ईकोफ्रेंडली प्रोडेक्ट बनाए जा रहे हैं. गोबर से सुपर कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट खाद तथा जैविक कीटनाशक बन रहे हैं. गोबर से अगरबत्ती, दीये, रंग-गुलाल, मूर्तियां, आर्ट पीस, चप्पल, पेंट जैसे प्रोडक्ट भी पहले से बन रहे हैं. सी मार्ट के जरिए छत्तीसगढ़ के साथ ही देशभर में इन उत्पादों को पहुंचाने की तैयार है. फल, सब्जियों के साथ ही अनाज की भी आर्गेनिक खेती शुरू हो चुकी है. गोबर काठ और कण्डे से शवदाह की पुरानी परम्परा जीवित हुई है. इससे पेड़ों और पर्यावरण की सुरक्षा हो रही है. एक सोच से कितना कुछ और कितनी तेजी से बदल सकता है, इसे भूपेश ने साबित कर दिया है. पर विपक्ष को यह सब दिखाई नहीं देता. उसे छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों पर कोई गर्व नहीं है. बातें तो वह भी सनातन की करता है पर उसके सनातन का फार्मूला अलग है. भूपेश का छत्तीसगढ़ गौ सेवा के नए दृष्टांत स्थापित कर रहा है, प्रभु श्रीराम को जन-जन से जोड़ रहा है. अब तो खेती किसानी की सनातन परम्पराओं को पुनर्जीवित कर सनातन का मुद्दा भी लगभग छीन लिया है.





