नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत पाकिस्तान एक बार फिर कूटनीति की पिच पर मैच खेलने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और एनएसए जेक सुलविन का दावा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान में बातचीत शुरू करा दी है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि अमेरिकी इसका श्रेय जरूर ले रहे हैं, लेकिन वह ऐसा करते रहते हैं। जबकि सामरिक रणनीति पर बारीक नजर रखने वाले मेजर जनरल (रिटायर) अशोक मेहता का कहना है कि भारत ने पाकिस्तान के रिश्तों में मसल पॉवर दिखाने के बाद भूल सुधार करना शुरू किया है। मेहता का यहां तक दावा है कि 2021 के अंत तक दक्षेस (सार्क) शिखर सम्मेलन की भूमिका तैयार हो जाएगी।
मेजर जनरल की भविष्यवाणी कितनी सही होगी, यह वक्त बताएगा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच में औपचारिक संदेशों का आदान प्रदान शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इमरान खान को पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर संदेश भेजा था। इमरान खान के कोविड-19 से संक्रमित होने पर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री इमरान खान ने पत्र भेजकर दोनों देशों के बीच में सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय रिश्ते पर जोर दिया है। इसके साथ कश्मीर मुद्दे को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। इससे पहले दोनों देशों के सैन्य आपरेशन महानिदेशक (लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के सैन्य अधिकारी) ने बात की थी। कहा जाता है कि यह बातचीत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पाकिस्तान के उनके समकक्ष मोइद डब्ल्यू यूसुफ के बीच किसी तीसरे देश में हुई मुलाकातों और बैक चैनल डिप्लोमेसी का नतीजा है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी जाएंगे पाकिस्तान?
प्रधानमंत्री इमरान खान चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान आएं। पाकिस्तान में होने वाला सार्क (दक्षेस) शिखर सम्मेलन हो। भले ही इससे पहले इमरान खान को इसके लिए पहले भारत का दौरा करना पड़े। लेकिन कूटनीति के जानकार अभी यह भरोसा नहीं दिला पा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी क्या पाकिस्तान जाएंगे? क्योंकि सार्क के चार्टर के अनुसार, किसी भी सदस्य देश के राष्ट्राध्यक्ष की अनुपस्थिति में सार्क नहीं हो सकता। सार्क के अन्य सभी सदस्य देशों ने शिखर सम्मेलन होने अथवा न होने की पूरी जिम्मेदारी भारत के ऊपर डाल रखी है। यानी भारत को छोड़कर अभी तक सब सार्क के पाकिस्तान में आयोजन पर तैयार हैं। प्रोफेसर एस डी मुनि ने माना कि सार्क के होने का अर्थ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में संवाद, रिश्ते को सुधारने के प्रयास आदि में तेजी आना। लेकिन सबकुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति पर टिका है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि हाल में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सिंधु नदी के जल समझौते को लेकर बात हुई है। इसका मतलब है कि धीरे-धीरे रिश्ते मिठास की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन किसी नतीजे पर पहुंच जाना जल्दबाजी होगी।




