रायपुर। पश्चिम बंगाल में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मोदी कैबिनेट की पहली बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। बैठक में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान वैधानिक संरक्षण देने संबंधी केंद्रीय मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत और राष्ट्रभक्ति की भावना को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।

दरसल मोदी कैबिनेट ने ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। संशोधन लागू होने पर बंकिम चंद्र चटर्जी रचित ‘वंदे मातरम’ पर वही नियम और प्रतिबंध लागू होंगे जो अभी राष्ट्रगान के लिए हैं। इसका उल्लंघन संज्ञेय अपराध माना जाएगा। इस संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान किया जाना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आत्मा, स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और करोड़ों देशवासियों की राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों में नई ऊर्जा और आत्मबल का संचार किया था। यह गीत आज भी हर भारतीय के मन में मातृभूमि के प्रति समर्पण, सेवा और गौरव की भावना जागृत करता है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार निरंतर भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और जनभावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान एवं गरिमा को बनाए रखने का आह्वान भी किया।
अपमान करने पर हो सकती है जेल
वर्तमान कानून के तहत जो व्यक्ति राष्ट्रगान के गायन में जानबूझकर बाधा डालता है, उसे तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की जेल का प्रावधान है। अब राष्ट्रीय गीत को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया जा रहा है, ताकि इसकी गरिमा सुरक्षित रहे। इससे पहले 2005 में कानून में संशोधन कर तिरंगे के अपमानजनक इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग पिछले साल दिसंबर में संसद में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर हुई एक विशेष चर्चा के दौरान उठी थी।




