रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब समाज के अंतिम छोर तक असर दिखा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना भूमिहीन श्रमिक परिवारों के लिए आर्थिक संबल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल राहत दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह भी खोल रही है।

योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। यह राशि दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को भी आधार प्रदान कर रही है। कोरबा जिले के ग्राम भुलसीडीह निवासी मनोज खूंटे इसकी एक मिसाल हैं। भूमिहीन होने के कारण उनका जीवन पहले काफी कठिन था। आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं होने से वे मजदूरी पर निर्भर थे, जिससे चार सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था।
खूंटे बताते हैं कि योजना के तहत मिलने वाली वार्षिक सहायता राशि ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है। अब वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्चों और जरूरी जरूरतों को पूरा करने में कर रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक राहत मिलने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब उन्होंने भविष्य की योजना बनानी शुरू कर दी है। सहायता राशि में से कुछ बचत कर वे छोटा व्यवसाय शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे स्थायी आय का स्रोत विकसित हो सके।
खूंटे ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जीवन में विश्वास और सुरक्षा की भावना पैदा की है। अब वे अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर पा रहे हैं और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। यह योजना श्रमवीरों को आर्थिक मजबूती देने के साथ उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है, जो “सशक्त श्रमिक, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




