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स्कूली बसों और सरकारी शिक्षकों को निर्वाचन कार्य में लगाना उचित नहीं : पॉल

By @dmin Published January 30, 2020
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रायपुर। शिक्षा का अधिकार कानून में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि प्रत्येक शिक्षा सत्र में प्रत्येक शिक्षक को 220 दिन अध्यापन में अनिवार्य रूप से देना है, लेकिन केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड और एनसीपीसीआर के सर्वे बताते है कि शिक्षक सिर्फ 42 दिन ही अध्यापन में दे पा रहे है, बाकि समय चुनाव ड्यूटी, जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यो में व्यस्त रहते है जो चिंता का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने भी वर्ष 2013 में यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों को स्कूल समय पर गैर-शैक्षणिक कार्यो में नहीं लगाया जा सकता है।
छग पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि स्कूली बसों और सरकारी शिक्षकों को निर्वाचन कार्य में लगा दिया जाता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है, वैसी भी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है और सरकारी शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यो में लगाया जाना उचित नहीं है। सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, जो मलिटी एजुकेशन की बात करते है।

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