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खेती की आधुनिक पद्धति, ड्रिप, स्प्रिंकलर से सब्जी उत्पादन में मिली बड़ी सफलता

By Mohan Rao Published March 23, 2026
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बी फार्मेसी पढ़े युवा रमेश प्रेमी ने खेती में तलाशा अपना भविष्य, 5 एकड़ खेती से 10 ग्रामीण महिलाओं को दिया रोजगार

रायपुर। छत्तीसगढ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम जमगहन के युवा किसान रमेश प्रेमी आज आधुनिक और जैविक खेती के माध्यम से एक सफल किसान के रूप में पहचान बना चुके हैं। अपनी मेहनत, नई तकनीक और जैविक पद्धति से खेती करके आज एक मिसाल कायम की है। वर्तमान में वे लगभग 5 एकड़ भूमि में खेती कर रहे हैं और आय से खेती को और अधिक उन्नत करने का प्रयास कर रहे हैं। रमेश प्रेमी मुख्य रूप से सब्जी की खेती करते हैं। उनकी प्रमुख फसलें खीरा, लौकी, करेला, टमाटर और बैंगन हैं। इनमें भी वे सबसे अधिक करेला की खेती करते हैं, जिससे उन्हें अच्छा उत्पादन और मुनाफा मिलता है। इसके अलावा वे इंटरक्रॉपिंग पद्धति भी अपनाते हैं, जिसमें चना (बूट), प्याज, अदरक और हल्दी की खेती भी करते हैं। इससे उनकी जमीन का बेहतर उपयोग होता है और आय के अतिरिक्त स्रोत भी बनते हैं।

रमेश प्रेमी की खेती की सबसे खास बात यह है कि वे जैविक खेती को अधिक प्राथमिकता देते हैं। वे रासायनिक उर्वरकों का कम उपयोग करते हैं और प्राकृतिक व जैविक तरीकों से खेती करते हैं। उनका कहना है कि इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी खेती में ड्रिप इरिगेशन (ड्रिप सिस्टम) जैसी आधुनिक तकनीक को अपनाया है। इस तकनीक से पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में पानी और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बेहतर होती हैं।

रमेश प्रेमी को खेती में बिलाईगढ़ कृषि और उद्यानिकी विभाग से भी समय-समय पर सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है। नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर वे अपनी खेती को और अधिक उन्नत बना रहे हैं। उनकी खेती से न सिर्फ उन्हें आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि वे गांव में 10 ग्रामीण महिलाओं को पूरे साल रोजगार भी दे रहे हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है और गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

उन्नत किसान रमेश प्रेमी की खेती और सफलता

युवा किसान रमेश प्रेमी ने बीफार्मेसी की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ समय तक उन्होंने मेडिकल और हॉस्पिटल क्षेत्र में भी काम किया, लेकिन वर्ष 2016 से उन्होंने खेती को अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया। कोरोना काल के बाद उन्होंने पूरी तरह से हॉस्पिटल का काम छोड़कर खेती में ही अपना पूरा समय देना शुरू कर दिया है। पढ़ाई से मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने खेती को अपना कर यह साबित कर दिया कि यदि खेती वैज्ञानिक और नई तकनीकों के साथ की जाए तो यह किसी भी नौकरी से कम नहीं है।

शुरुआत में लोगों को यह फैसला थोड़ा अटपटा लगा। रमेश प्रेमी बताते हैं कि ष्मैंने मेडिकल फील्ड की पढ़ाई की है, लेकिन मुझे लगा कि खेती में ज्यादा संभावनाएं हैं। कई किसान बिना पढ़ाई के भी अच्छी खेती कर रहे हैं, इसलिए मैंने सोचा कि अगर मैं पढ़ाई और नई तकनीक के साथ खेती करूं तो इससे बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आज उसका परिणाम सामने है। ष्वे आगे युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं कि जैविक खेती और सब्जी उत्पादन के माध्यम से किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। यदि युवा आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ खेती करें तो यह एक सफल और सम्मानजनक व्यवसाय बन सकता है।

खेती को यदि वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह एक बहुत अच्छा व्यवसाय बन सकता है। वे कहते हैं कि आज के समय में युवा वर्ग केवल नौकरी के पीछे भाग रहा है, जबकि खेती में भी अपार संभावनाएं हैं। आज ग्राम जमगहन के युवा किसान रमेश प्रेमी अपनी मेहनत और नवाचार से न सिर्फ खुद सफल हो रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। उनकी सफलता यह बताती है कि खेती में नई सोच और तकनीक के साथ काम किया जाए तो गांव में रहकर भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है।

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