नोएडा (एजेंसी)। कोरोना के कहर के बीच प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का लापरवाह रवैया जारी है। विभिन्न हेल्पलाइन के जरिये कोविड संक्रमितों की मदद के दावे खोखले नजर आने लगे हैं। बृहस्पतिवार को एक और संक्रमित बुजुर्ग ने व्यवस्था से लाचार होकर होम आइसोलेशन में दम तोड़ दिया। वहीं, पत्नी अकेले रातभर शव के साथ बैठी रही। उनकी मदद के लिए कुछ पड़ोसियों ने तो हाथ बढ़ाए, लेकिन विभाग से कोई मदद नहीं मिल सकी। दरअसल, सेक्टर-22 निवासी इंश्योरेंस कंपनी से रिटायर दरबान सिंह रावत में 4-5 दिन पहले करोना की पुष्टि हुई थी।
एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान बीमारी का तो पता चला, लेकिन बेड की कमी से अस्पताल ने उन्हें भर्ती नहीं किया। कोई संतान नहीं होने व रिश्तेदार पास न होने से उन्होंने पड़ोसियों से सहायता मांगी। पड़ोसी दिवान सिंह का आरोप है कि बुजुर्ग की गंभीर हालत देखकर उन्होंने सभी सरकारी हेल्पलाइन से मदद मांगी। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन व अस्पतालों से संपर्क किया, लेकिन कहीं किसी ने मदद नहीं की। बृहस्पतिवार शाम 4 बजे बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया तो पड़ोसियों ने दोबारा स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया। शव ले जाने के लिए एक वैन तो आई, लेकिन शव पैक करने के लिए 3000 रुपये मांगे गए।
जिसे देने से इंकार करने पर वैन कर्मी शुक्रवार सुबह 6 बजे शव अंतिम निवास पहुंचाने की बात कहकर चले गए। अब पड़ोसियों ने आपसी सहयोग से शव को सुबह अंतिम निवास तक पहुंचाने की तैयारी की है। महिला की हालत भी ठीक नहीं है, उन्हें खुद के संक्रमित होने का भी डर है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि मामला संज्ञान में आने के बाद भी देर रात तक किसी अधिकारी ने महिला से संपर्क नहीं किया। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच करने की बात कहकर इसे टाल दिया।
पीडि़त ने निजी अस्पताल में जांच कराई जहां से होम आइसोलेशन में भेज दिया गया। मामले में जिले की संस्थाओं को कोई सूचना नहीं भेजी गई है।
सुहास एलवाई, जिलाधिकारी



