अंबाला (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए लंबे इंतजार के बाद आखिरकार राफेल ने भारत की जमीन पर लैंडिंग की। फं्रास से 7364 किलोमीटर का सफर तय कर 4.5 फोर्थ जनरेशन के फाइटर जेट राफेल बुधवार को अंबाला की सरजमीं पर उतरे। इन्हें रिसीव करने के लिए खुद वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया पहुंचे। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत बताया। साथ ही उन्होंने भारतीय वायुसेना को इसके लिए बधाई दी। पांचों राफेल आरबी-001 से 005 सीरीज के होंगे। आरबी का मतलब है एयर चीफ राकेश भदौरिया, जबकि शेष बीएस-001 से जुड़े हैं। बीएस का मतलब है पूर्व एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ। राफेल 17 स्कवाड्रन का हिस्सा होंगे। इसे गोल्डन एरोस का नाम दिया गया है।
बता दें कि राफेल सौदे को वायुसेना की लड़ाकू क्षमताओं में आ रही कमी को ध्यान में रखते हुए किया गया था। चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध लडऩे के लिए 42 से ज्यादा यूनिट्स की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन वायुसेना की यूनिट्स घटकर 31 हो गई थी। फ्रांस में बने राफेल लड़ाकू विमानों को खासतौर पर भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किया गया है। इसमें भारतीय परिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए हेल्मेट माउंटेड साइट, रडार चेतावनी रिसीवर, फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर, इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम, जैमर, उच्च ऊंचाई वाले ठिकानों से संचालन के लिए कोल्ड इंजन जैसे फीचर्स लगाए गए हैं।
सात पायलट उड़ाकर लाए पांच राफेल
सात प्रशिक्षित पायलट इन पांच राफेल लड़ाकू विमानों को भारत तक सकुशल उड़ा कर लाए। यह सात पायलट करीब एक साल से फ्रांस में राफेल के संचालन की ट्रेनिंग ले रहे थे। अब ये पायलट भारत में अन्य पायलटों को प्रशिक्षण देंगे और खुद भी फ्रांस में ट्रेनिंग लेते रहेंगे। फ्रेंच एयरफोर्स के सहयोग से इन विमानों को हवा में ही रिफ्यूल किया गया। फ्रांस से भारत तक उड़ान के पहले चरण में राफेल यूएई के अलदाफ्ऱा एयरबेस पर उतारे गए। उड़ान का दूसरा चरण इसी एयरबेस से शुरू हुआ और 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पहुंचकर खत्म हुआ।
रक्षा मंत्री ने कहा- सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत
राफेल विमानों के अंबाला एयरबेस पर लैंड करने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘बड्र्स अंबाला में सुरक्षित उतर गए हैं। भारत में राफेल लड़ाकू विमानों का पहुंचना हमारे सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है। ये मल्टीरोल वाले विमान वायुसेना की क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। मैं एक भारतीय वायुसेना को बधाई देता हूं। झे यकीन है कि 17 गोल्डन एरोज स्क्वाड्रन, ‘उदयम आश्रम’ के अपने आदर्श वाक्य को जारी रखेंगे। मुझे बेहद खुशी है कि भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को समय पर बढ़ावा मिला।
क्या है खासियतें:
- राफेल हवा से जमीन पर मार वाली स्कैल्प मिसाइल है
- 150 किमी की बियोंड विज़ुअल रेंज मिसाइल
- यह हवा से हवा में और हवा से जमीन पर हमले कर सकता है।
- यह लड़ाकू विमान परमाणु आयुध का इस्तेमाल करने में सक्षम है।
- राफेल विमान दो इंजनों वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है।
- राफल 24,500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम है और 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी भी है।
- राफेल में बहुत ऊंचाई वाले एयरबेस से भी उड़ान भरने की क्षमता है। लेह जैसी जगहों और काफी ठंडे मौसम में भी लड़ाकू विमान तेजी से काम कर सकता है।
- राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा है और इसकी मारक क्षमता 3700 किमी. तक है।




