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दो साल में 3000 से ज्यादा नक्सलियों ने किया सरेंडर, दो हजार से ज्यादा गिरफ्तार, 500 से ज्यादा ढेर

By Mohan Rao Published March 26, 2026
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डिप्टी सीएम विजय शर्मा
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जगदलपुर में प्रेस वार्ता के दौरान डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने साझा की महत्वपूर्ण जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ तेजी से नक्सलमुक्त होने की दिशा में बढ़ रहा है। एक दिन पहले बुधवार को कुख्यात नक्सली पापा राव सहित 18 नक्सलियों ने हथियार डाले। आकंड़ों की बात की जाए तो बीते दो वर्षों में 3000 से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर कर पुनर्वास को अपनाया है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बुधवार को जगदलपुर में प्रेस वार्ता के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सीसी मेंबर से लेकर विभिन्न स्तरों के कैडर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 2 हजार से अधिक नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है तथा लगभग 500 से अधिक नक्सली मुठभेड़ों में निष्प्रभावी (न्यूट्रलाइज) किए गए हैं।

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा बीते दो सालों में 5000 से अधिक सशस्त्र कैडर में कमी आई है, जो नक्सल संगठन की रीढ़ को कमजोर करने वाला निर्णायक कारक सिद्ध हुआ है। वर्तमान स्थिति में डीकेजेडसी स्तर का कोई सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है और केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली उत्तर एवं दक्षिण के दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके भी शीघ्र पुनर्वास करने की संभावना व्यक्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और पुनर्वास नीति की सफलता का भी परिचायक है। प्रेसवार्ता के दौरान इस महत्वपूर्ण अवसर पर नारायणपुर विधायक एवं मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंहदेव,  डीजीपी अरुण देव गौतम, पुलिस महानिदेशक एंटी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद, नक्सल उन्मूलन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, एडीजी सीआरपीएफ, बस्तर कमिश्नर, आईजी सुंदरराज पी., बीजापुर के पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों के अधिकारी उपस्थित रहे।

31 मार्च तक नक्सलमुक्त हो जाएगा छत्तीसगढ़ : डिप्टी सीएम
डिप्टी सीएम शर्मा ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि राज्य सरकार, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित समय-सीमा के अनुरूप राज्य सरकार ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्य किया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है।

यह जिले हुए नक्सलमुक्त
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बस्तर संभाग सहित कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जैसे जिले, जो कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे थे, अब पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुके हैं। बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुका है। डिप्टी सीएम ने कहा केंद्रीय और राज्य के सुरक्षा बलों के जवानों ने विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया है, जिसके लिए पूरा प्रदेश उनका ऋणी है।

बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल नक्सलवाद के उन्मूलन तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर युवाओं को खेल के क्षेत्र में अवसर प्रदान किया गया, जिससे उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिली। इसी प्रकार बस्तर पंडुम के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का कार्य किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा आने वाले समय में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगे।

विकास केन्द्रों में बदलेंगे सुरक्षा कैंप
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर के आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित लगभग 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। भविष्य में ये कैंप थाना, स्कूल, अस्पताल तथा लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा क्षेत्र में स्थायी विकास की आधारशिला मजबूत होगी। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘लाल आतंक से मुक्ति’ के संकल्प, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में यह अभियान निरंतर सफलता की ओर अग्रसर है। उन्होंने इसरो, एनटीआरओ, आईटीबीपी और एनएसजी जैसी संस्थाओं द्वारा प्राप्त तकनीकी सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया, जिसने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया।

विकास और संभावनाओं की नई दिशा में आगे बढ़ रहा बस्तर
डिप्टी सीएम ने कहा कि बस्तर अब भय और हिंसा के अतीत से बाहर निकलकर शांति, विकास और संभावनाओं की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार से बचें और विकास की इस यात्रा में सहभागी बनें। उन्होंने दोहराया कि जल, जंगल और जमीन बस्तर के लोगों का है और उसके संरक्षण एवं विकास में स्थानीय समुदाय की ही प्रमुख भूमिका होगी। उपमुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि निर्धारित समय-सीमा तक छत्तीसगढ़ सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त होकर देश के लिए शांति, विकास और सुशासन का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।

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