बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में 20 साल बाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना न देने पर 6 महीने अतिरिक्त सजा होगी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस कारण साबित न हो। सुनाया है। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है। वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस पर सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
बता दें 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को हाईकोर्ट भेज दिया। हाईकोर्ट ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपना निर्णय दिया। हाईकोर्ट के फैसले ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया है।




