दंतेवाड़ा। एक ऐसा भी वक्त था जब दंतेवाड़ा में रहने वाली ’’नजमा खान’’ अपने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुये आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही थीं। पति की आमदनी सीमित थीं जिससे घर के खर्च और बच्चों की पढ़ाई बूढी सास की दवाइयों तथा रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन हो जाता था। पति ठेले पर घर घर जाकर रजाई गद्दों में रूई भरने का काम करते थें। परन्तु मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महतारी वंदन योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना ने महिलाओं में सकारात्मक परिवर्तन का दौर प्रारंभ कर दिया। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू हुई इस योजना ने नजमा जैसी लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया। और दंतेवाड़ा की नजमा को भी इस योजना का लाभ मिलने लगा हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता छोटी जरूर थीं लेकिन परिवार की जरूरतों को पूरा करने में काफी मददगार साबित हुई।
नजमा ने इस राशि का उपयोग बहुत ही समझदारी से करना शुरू किया उसने अब एक छोटी सी दुकान किराये पर लेकर ठेले की जगह दुकान पर ही रजाई गद्दे बनाने का काम शुरू किया इससे नजमा और उसके पति को ठेला लेकर घूमना नहीं पड़ता है। ग्राहक स्वयं दुकान पर पहुँचते है इससे नजमा अपने परिवार को समय दे पाती है अपनी बीमार सास की देखभाल भी अच्छे से कर लेती है और साथ ही नजमा के परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जिससे नजमा और उसका परिवार बेहद खुश है। नजमा कहती कि महतारी वंदन योजना से मिली सहायता ने उसे आत्मनिर्भर बनने हौसला दिया है। अब वह दूसरी महिलाओं को भी इस राशि से आत्मनिर्भर बनने के लिये प्रेरित करती है। नजमा की कहानी यह संदेश देती है कि सही अवसर, सरकारी सहायता और हौसला मिलकर जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते है। महतारी वंदन योजना उसके लिये केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनी।




