नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन कोवैक्सिन जानवरों पर ट्रायल में सफल रही है। कंपनी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि कोवेक्सीन ने बंदरों में वायरस के प्रति ऐंटीबॉडीज विकसित की। यानी लैब के अलावा जीवित शरीर में भी यह वैक्?सीन कारगर है, यह साबित हो गया है। कंपनी ने कहा कि बंदरों पर स्?टडी के नतीजों से वैक्सीन की इम्युनोजीनिसिटी (प्रतिरक्षाजनकता) का पता चलता है। भारत बायोटेक ने खास तरह के बंदरों को वैक्सीन की डोज दी थी। फिलहाल इस वैक्सीन का भारत में अलग-अलग जगहों पर फेज 1 क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने इसी महीने भारत बायोटेक को फेज 2 ट्रायल की अनुमति दी है।

कोवैक्सिन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च – नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी और भारत बायोटेक ने मिलकर डेवलप किया है। भारत बायोटेक ने 29 जून को ऐलान किया था कि उसने वैक्सीन तैयार कर ली है। आईसीएमआर-भारत बायोटेक की कोवैक्सीन एक इनऐक्टिवेटेड वैक्सीन है। यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्स से बनी है जिन्हें मार दिया गया था ताकि वे इन्फेक्ट न कर पाएं। कोविड का यह स्ट्रेन पुणे की एनआईवी लैब में आइसोलेट किया गया था। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनती हैं। भारत में बनी पहली कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन का फेज 1 ट्रायल 15 जुलाई 2020 से शुरू हुआ था। देशभर में 17 लोकेशंस पर फेज 1 ट्रायल हुए। कोवैक्सीन ट्रायल की सारी डिटेल्स आईसीएमआर को भेजी जाएंगी। वहीं पर डेटा को एनलाइज किया जा रहा है।
20 बंदरों पर चार ग्रुप में किया गया रिसर्च
भारत बायोटेक ने 20 बंदरों को चार समूहों पर बांटकर रिसर्च किया। एक ग्रुप को प्लेसीबो दिया गया जबकि बाकी तीन ग्रुप्स को तीन अलग-अगल तरह की वैक्सीन पहले और 14 दिन के बाद दी गई। दूसरी डोज देने के बाद, सभी बंदरों को SARS-CoV-2 से एक्सपोज कराया गया। वैक्सीन की पहली डोज दिए जाने के तीसरे हफ्ते से बंदरों में कोविड के प्रति रेस्पांस डेवलप होना शुरू हो गया था। वैक्सीन पाने वाले किसी भी बंदर में निमोनिया के लक्षण नहीं मिले। भारत में कम से कम सात कंपनिया कोरोना वायरस की अलग-अलग वैक्सीन पर काम कर रही हैं। सीरम इंस्टिट्यूट ने ऑक्सफर्ड वैक्सीन का ट्रायल रोक दिया है जबकि बाकी जारी हैं।




