रायपुर। राज्य सरकार की पशुधन संवर्धन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की पहल के तहत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां पशुपालकों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं। दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाकर यह व्यवस्था न केवल पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी सहायक बन रही है।
राज्य शासन के निर्देशानुसार जिलों में संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा वाहनों के माध्यम से पशुपालकों को उनके घर और गांव के समीप ही निःशुल्क उपचार, टीकाकरण तथा तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा से उन क्षेत्रों के पशुपालकों को विशेष लाभ मिल रहा है, जहां स्थायी पशु चिकित्सालयों तक पहुंचना कठिन होता है।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन गांवों में शिविर लगाकर पशुओं का उपचार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवापान, डिटिकिंग, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान तथा आवश्यक औषधियों का वितरण किया जा रहा है। प्रत्येक यूनिट में पशु चिकित्सक, पैरावेट एवं चालक-सह-अटेंडेंट की तैनाती की गई है तथा वाहनों में आधुनिक उपकरणों और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
इसी क्रम में बलरामपुर जिले में अब तक 14 हजार 374 पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों के माध्यम से 1 लाख 67 हजार 176 पशुओं का उपचार, 1 लाख 38 हजार 892 पशुओं का टीकाकरण, 87 हजार 143 पशुओं को औषधि वितरण, 53 हजार 940 नमूनों की जांच, 12 हजार 758 बधियाकरण तथा 710 कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान की गई हैं। यह आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
पशुधन विकास विभाग द्वारा चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ पशुपालकों को पशुपालन की वैज्ञानिक पद्धतियों, मौसमी रोगों की रोकथाम, पशुओं के बेहतर रख-रखाव तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। किसान क्रेडिट कार्ड सहित अन्य लाभकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए भी ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है।
राज्य शासन द्वारा जारी 1962 टोल फ्री हेल्पलाइन पशुपालकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। इस नंबर पर कॉल करते ही बीमार, घायल अथवा दुर्घटनाग्रस्त पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल टीम मौके पर पहुंचकर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है। घर पहुंच सेवा के कारण पशुओं की मृत्यु दर में कमी आई है तथा दुग्ध, मांस और अंडा उत्पादन में वृद्धि के साथ पशुपालकों की आय में भी निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
वर्षा ऋतु को देखते हुए विभाग द्वारा पशुपालकों को पशुओं को सुरक्षित एवं सूखे स्थानों पर रखने, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने तथा आंधी-तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे पशुओं को नहीं बांधने जैसी सावधानियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की यह अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन संरक्षण, पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।




