नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली हाईकोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल उपकरणों और दवाइयों की जमाखोरी को लेकर आज सुनवाई हुई। इस दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि कोरोना के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाई को जमा करने का काम राजनेताओं का नहीं है। नेताओं द्वारा दवा बांटने के मामले में कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए दवाइयों की जमाखोरी ठीक बात नहीं है, ऐसा न हो। कोर्ट ने नेताओं को निर्देश दिया है कि अगर आप भला करना चाहते हैं तो जिन दवाइयों की जमाखोरी की है, उसे सरकारी अस्पतालों में वितरण के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को सौंप दें। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आपसे दवाइयों की जमाखोरी की उचित जांच करने की उम्मीद है। साथ ही कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
Delhi High Court says political leaders have no business to hoard stocks. Let them surrender it to Director General of Health Services for distribution to govt hospitals. HC says expect Delhi Police to conduct proper probe into hoarding of medicines, asks to file status report
— ANI (@ANI) May 17, 2021
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 मई तक के लिए स्थगित कर दी है। अदालत ने पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वह लगाए कि नेता कहां से दवा लाकर इक_ा कर रहे हैं और साथ ही इस मामले की सही जांच करें। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ऐसा बताया गया है कि ये दवाएं जनता की भलाई के लिए खरीदी गईं हैं, न कि सियासी फायदे के लिए। इसलिए नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे कोविड-19 दवाओं के अपने भंडार दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) को सौंप देंगे, ताकि सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंदों के बीच इनका वितरण किया जा सके।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने दिल्ली पुलिस द्वारा पेश की गई उस स्थिति रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की जो राष्ट्रीय राजधानी में रेमडेसिविर तथा कोविड-19 की अन्य दवाओं की नेताओं द्वारा जमाखोरी तथा वितरण के आरोपों के संबंध में की गई जांच से संबंधित थी।
अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि नेता बड़ी मात्रा में कोविड-19 की दवाओं को खरीद रहे हैं और उन्हें वितरित कर रहे हैं जबकि मरीज इन दवाओं के लिए दर-दर भटक रहे हैं। याचिका में इस बारे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।




