ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: Gustakhi Maaf: रेवड़ी हमारी संस्कृति, इससे इंकार कैसा?
Share
Notification Show More
Latest News
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 15 दिनों में जारी हुए जाति प्रमाण पत्र
पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिला अधिकार, जाति प्रमाण पत्र बना शिक्षा और शासकीय योजनाओं की राह आसान
September 21, 2026
बिहान से मिली उड़ान, साय सरकार की योजनाओं से मजबूत हुआ आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन की दिख रही जमीनी तस्वीर
September 21, 2026
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा की
सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाने के निर्देश
September 21, 2026
मन में बरसों से बसी थी रामलला के दर्शन की आस, साय सरकार की योजना से पूरा हुआ डोमन-पार्वती का सपना
कबीरधाम के दंपती ने विशेष ट्रेन से पहुंचकर किए रामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन
September 21, 2026
सतत जांच, उपचार और विभागीय परामर्श से हुए पूरी तरह स्वस्थ
सेवा संकल्प अभियान : टीबी उन्मूलन कार्यक्रम : विजय को मिली टीबी से मुक्ति
September 21, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Breaking NewsChhattisgarhDurg-Bhilai

Gustakhi Maaf: रेवड़ी हमारी संस्कृति, इससे इंकार कैसा?

By Om Prakash Verma Published November 16, 2023
Share
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
SHARE

-दीपक रंजन दास
देश के एक बड़े तबके का मानना है कि राजनीति में रेवड़ी बांटने की परम्परा का अंत होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे देश के एक बड़े वर्ग पर निठल्लापन हावी हो रहा है। बैठे-बिठाए खाने-पीने का जुगाड़ हो जाए तो फिर मेहनत कौन करना चाहेगा। किसानों को खेतीहर मजदूर नहीं मिल रहे, भवन निर्माण ठेकेदार भी कहते हैं कि अब सस्ते में लेबर नहीं मिलता। असंतोष की यह लहर नौकरीपेशा वर्ग को भी प्रभावित कर रही थी। उनका भी मानना था कि उनके टैक्स के पैसे से गरीबों की ऐश हो रही है। रेवडिय़ों के कारण उद्यमिता हतोत्साहित होती है। यह वर्ग अब तक भाजपा का फैन था। भाजपा सिद्धांतत: रेवड़ी बांटे जाने के खिलाफ रही है। पर अब उसे भी समझ में आ गया है कि रेवडिय़ां देश की संस्कृति है। शादी-ब्याह से लेकर तीज-त्यौहारों तक में गिफ्ट और रिटर्न गिफ्ट लिया और दिया जाता है। यहां तक कि पूजा-पाठ भी इसका अपवाद नहीं है। पूजा पंडाल में भीड़ जुटानी हो तो भी भोग-भंडारा करना पड़ता है। लोग देवी के दर्शन करने कम और खिचड़ी खाने ज्यादा आते हैं। इसे हम रेवड़ी नहीं व्यवहार कहते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा कि सरकारी दफ्तरों में काम करवाने के लिए दिया जाने वाला पैसा। कुछ लोग इसे घूस कहते हैं पर जिन्हें इन विभागों से रोज-रोज काम पड़ता है, वो जानते हैं कि यह व्यवहार है। गाड़ी केवल पेट्रोल और डीजल से नहीं चलती, उसके इंजन में भी तेल डालना होता है। टायर ट्यूब वाले हों या ट्यूबलेस, उसमें हवा भरनी होती है। व्यवहार बनाए रखने के कई लाभ होते हैं। व्यवहार बना रहे तो कामकाज नहीं अटकता, सूचनाएं समय पर मिल जाती हैं। लोग आपका सहयोग करने लगते हैं। यही बात चुनावों पर भी लागू होती है। इस बार सभी पार्टियों ने किसानों के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं के लिए रेवडिय़ां तय कर दीं। धान की कीमतों में 33 फीसदी के ज्यादा बढ़ोत्तरी की घोषणा की गई। महिलाओं को मुफ्त में प्रति माह हजार या इससे भी अधिक रुपए देने की घोषणा की गई। युवाओं को कालेज तक आने-जाने के लिए मुफ्त परिवहन सेवा और नौकरियों की गारंटी दी गई। कांग्रेस ने तो ऋण माफखी के ब्रह्मास्त्र का भी उपयोग कर लिया। किसानों के साथ ही अब महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लिये गये ऋण को भी माफ करने की घोषणा की गई है। अब तक के आंकड़े बताते हैं कि महिला स्व-सहायता समूह ही वह इकलौता वर्ग था जिससे बैंकर्स खुश थे। सामूहिक जिम्मेदारी के तहत इनकी लोन री-पेमेंट सबसे अच्छी थी। यह एक उद्यमिता आंदोलन की तरह आगे बढ़ता रहा है। इन्हीं घोषणाओं के आधार पर अब मतदाताओं को सरकार चुननी है। देखना सिर्फ यह है कि किसकी घोषणा पर लोग यकीन करते हैं। अब जनता भी यह जानती और मानती है कि सरकारें ऐसे कर सकती हैं, बस उसकी नियत साफ होनी चाहिए।

You Might Also Like

पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिला अधिकार, जाति प्रमाण पत्र बना शिक्षा और शासकीय योजनाओं की राह आसान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन की दिख रही जमीनी तस्वीर

सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाने के निर्देश

कबीरधाम के दंपती ने विशेष ट्रेन से पहुंचकर किए रामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन

सेवा संकल्प अभियान : टीबी उन्मूलन कार्यक्रम : विजय को मिली टीबी से मुक्ति

Om Prakash Verma November 16, 2023
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article Breaking News : जिला अस्पताल के टॉयलेट के पास दो नकाबपोश प्रहरियों को पीटकर बंदी को ले गए, मोबाइल भी लूटा
Next Article वेदांता एल्यूमिनियम से देष को मिली रिस्टोरा लो कार्बन एल्यूमिनियम की पहली खेप वेदांता एल्यूमिनियम से देष को मिली रिस्टोरा लो कार्बन एल्यूमिनियम की पहली खेप

Ro.No.-13998/18

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?