-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की घोषणा कर सियासत की दिशा बदल दी है। घिसे-पिटे मुद्दों को छोड़कर अब विपक्ष बेरोजगारी भत्ते को लेकर सरकार पर हमलावर हो रहा है। विपक्ष के एक कद्दावर नेता ने रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत 11 लाख से अधिक बेरोजगारों में से सभी को भत्ता देने की मांग की है। भत्ते की घोषणा के बाद वैसे भी रोजगार कार्यालयों में भीड़ उमड़ पड़ी है। प्रत्येक जिले में हजारों की संख्या में लोगों ने अपना पंजीयन कराया है। युवाओं में ऐसा उत्साह निर्वाचन नामावली में नाम जुड़वाने को लेकर भी कभी नहीं देखा गया। वैसे भी पिछले कुछ दशकों में रोजगार दफ्तरों पर से युवाओं का भरोसा उठ चुका है। शहरी क्षेत्रों के बहुत कम युवा 12वीं के बाद यहां पंजीयन कराते हैं। उनका पूरा फोकस उच्च शिक्षा में अपना लक्ष्य हासिल करने पर रहता है। बड़ी संख्या में बच्चे पसंदीदा विषय और कालेज के लिए राज्य छोड़ देते हैं। ऐसे युवाओं में से अधिकांश फिर कभी लौटकर राज्य में नहीं आते। केरल और गुजरात की संपन्नता की भी मूल वजह यही है कि यहां से बड़ी संख्या में लोग राज्य और देश से बाहर निकलकर काम करते हैं। लोगों को जानकर हैरानी होगी कि संपन्न माने जाने वाले राज्य हरियाणा में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा 37।4 प्रतिशत है जबकि गरीबी के लिए मशहूर ओड़ीशा में यह सबसे कम 0।9 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 3।4 फीसदी है। ये आंकड़े दिसम्बर 2022 के हैं जिसे सेन्टर फॉर मानीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (ष्टरूढ्ढश्व) ने जुटाए हैं। रोजगार और बेरोजगारी के बीच बड़ा अजीब सा संबंध है। हरियाणा बेरोजगारी के शीर्ष पर हो सकता है पर प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह देश के शीर्ष पांच राज्यों में आता है। इस कसौटी पर सबसे कमजोर राज्य हैं उत्तर प्रदेश और बिहार। इसलिए बेरोजगारी भत्ते के लिए पात्र हितग्राहियों का चयन मुश्किल हो जाता है। कुछ लोग पंजीकृत बेरोजगार तो होते हैं पर उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती है। वे पैतृक व्यवसाय से जुड़ जाते हैं। अपना स्टार्टअप या बिजनेस शुरू कर देते हैं। ऐसे लोगों को बेरोजगारी भत्ता देने का कोई तुक नहीं बनता। छत्तीसगढ़ सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की अवधि 2 साल की रखी है। इस दौरान युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं को रोजगार के लिए तैयार करना होगा। जो ऐसा नहीं करेगा उसे बेरोजगारी भत्ता की पात्रता नहीं होगी। कौशल विकास वह हुनर है जो नए रोजगार का सृजन कर सकता है। छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों ने समूह में काम करने और कौशल विकास के द्वारा उद्यमी बनने की मिसालें कायम की हैं। बेहतर हो कि युवा और विशेषकर विपक्ष बेरोजगारी भत्ते को चाय नाश्ते की क्षतिपूर्ति मानना बंद करे। 2500 रुपए में न तो किस्मत बदलेगी और न ही बेरोजगारी दूर होगी। सीधा लाभ केवल इतना होगा कि युवा रोजगार दफ्तरों से जुड़ जाएंगे।





