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Gustakhi Maaf : चुनाव से पहले अब राम पर कोहराम

By Om Prakash Verma Published January 28, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
कैसी विडम्बना है कि जिस राम को लेकर भाजपा सत्ता में आई, उसी प्रभु श्रीराम के ननिहाल में उसे करारी शिकस्त का दुख झेलना पड़ा. 15 साल का वनवास काटकर कांग्रेस सत्ता में लौट आई. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि प्रभु श्रीराम किसके? छत्तीसगढ़ का श्रीराम से रिश्ता, रामनाम की राजनीति शुरू होने से भी काफी पहले का है. त्रेता युग से ही यह राम की भूमि रही है. राम की माता कौशल्या छत्तीसगढ़ की बेटी थी. इसलिए राम को यहां भांजा माना जाता है. यहां भांजे के पैर पूजे जाते हैं. एक समुदाय है जो अपने पूरे शरीर पर, यहां तक कि चेहरे पर भी, रामनाम का गोदना गुदवाता रहा है. छत्तीसगढ़िया जब भी किसी से मिलता है तो “राम-राम” कहता है. इसलिए तुरुप का जो इक्का केन्द्र में कांग्रेस के खिलाफ काम कर गया, उसे छत्तीसगढ़ में लेवाल नहीं मिल रहे. रामचरित मानस पर आधारित मानस गान भी यहां की जीवनशैली का हिस्सा है. गांव-गांव में मानस मंडलियां हैं और उनके बीच प्रतियोगिताएं भी होती रहती हैं. इसका सदियों का इतिहास है. मानस प्रतियोगिताओं को देखने-सुनने-गुनने के लिए हजारों की भीड़ एकत्रित होती है. इसमें स्त्री-पुरुष और बच्चे सभी शामिल होते हैं. इसलिए जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सालाना मानस गान उत्सव की घोषणा की तो विपक्ष के सीने पर सांप लोट गया. राजनीति में तत्काल प्रतिक्रिया का अपना महत्व है. इसलिए भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अजय चंद्राकर ने कांग्रेस को रामद्रोही कालनेमि बता दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कांग्रेस का राक्षसी चेहरा उजागर हो जाएगा. किसका राक्षसी चेहरा? भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, लोकपरंपरा को लेकर आगे बढ़ रही है. छत्तीसगढ़ी भाषा, बोली, खान-पान, शिल्प और आदिवासी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है. श्रीराम यहां की लोकसंस्कृति और लोकपरंपरा दोनों का हिस्सा हैं. श्रीराम को यहां इम्पोर्ट नहीं किया गया है. राम का नाम लेने की शुरुआत यहां चुनावी वर्ष में नहीं हुई. रामवनगमन पथ पर काम इस सरकार ने सत्ता में आते ही प्रारंभ कर दिया था. इनमें से श्रीराम की माता कौशल्या का मंदिर बन कर तैयार हो चुका है. श्रीराम ही क्यों, मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में “कृष्ण कुंज” भी बनवाया. गोवंशों की सुरक्षा के लिए गोठान योजना चलाई. कृष्णकुंजों में आक्सीजन देने वाले चंदन, रूद्राक्ष, बरगद, पीपल, कदंब जैसे वृक्षों का रोपण किया जा रहा है. साथ ही आम, इमली, बेर, गंगा इमली, जामुन, शहतुत, तेंदू, चिरौंजी, अनार, कैथा, नीम, पलाश, बेल, आंवला जैसे फलदायी वृक्ष भी लगाएं जा रहे हैं. रामवनगमन पथ के तहत 75 स्थलों का चयन किया गया है. पहले चरण में सीतामढ़ी-हरचौका, रामगढ़, शिवरी नारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा-सप्तऋषि आश्रम, जगदलपुर और रामाराम शामिल हैं. छत्तीसगढ़ के चप्पे-चप्पे में राम हैं. इसलिए यहां इसपर बे-सिरपैर की बातें की तो खामियाजा ही भुगतना पड़ेगा.

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