-दीपक रंजन दास
कांकेर जिले के परलकोट जलाशय में एक फूड इंस्पेक्टर का फोन गिर गया। पहले गोताखोर उतारे गए पर फोन नहीं मिला। इसके बाद फोन को निकालने के लिए भरी गर्मी में लगभग 21 लाख लीटर पानी को पम्प की सहायता से बहा दिया गया। जब घुटनों पानी बचा तो फोन मिल गया। हालांकि तब तक फोन बंद हो चुका था। फूड इंस्पेक्टर के अनुसार फोन में विभागीय डाटा था इसलिए उसका मिलना जरूरी था। यह तो केवल एक बहाना मात्र है। फोन पर लोग डाटा की केवल कापी रखते हैं। अधिकांश लोग डाटा के लिए क्लाउड का इस्तेमाल करते हैं। वैसे भी अधिकांश सरकारी डाटा किसी न किसी ऐप के जरिए सर्वर में सुरक्षित रहता है। दरअसल, यह पूरा मामला अधिकारी होने का बेजा फायदा उठाने का है। कूटनीति के तहत उन्होंने पहले जलसंसाधन विभाग के एसडीओ से फोन पर बात की। इसके बाद 30-30 एचपी के दो पंप लगाकर बांध का पानी बहा दिया। यह एक अक्षम्य अपराध है। पर इसकी भी एक वजह है। लोग अपनी औकात से ज्यादा से शौक पालने लगे हैं। 15 हजार का फोन और डेढ़ लाख का फोन काम एक ही जैसा करता है। आपकी जरूरत की फोटो 12 मेगापिक्सल कैमरा भी खींच सकती है। इससे ऊपर से साइज का फोटो खींचना बेकार का शौक है। मोबाइल का स्क्रीन रिजोल्यूशन फोटो को सुन्दर दिखा सकता है पर हकीकत में फोटो केवल उतनी ही अच्छी होती है जितनी की रोशनी होती है। बहरहाल, कीमती कैमरा फोन खरीदना आपका शौक हो सकता है। पर यह शौक औकात से इतना बड़ा भी नहीं होना चाहिए कि फोन गुम जाए तो पानी में गिर जाए तो दिल का दौरा पडऩे की नौबत आ जाए। फोन ही तो है। अब तो फोन नंबर भी ईमेल या क्लाउड पर सेव होते हैं। फोन गुमने से नंबर नहीं गुमते। कुछ ऐसा ही हाल गाडिय़ों का भी है। लोग औकात से महंगी गाड़ी खरीद लेते हैं और स्क्रैच लगने पर भी रोने लगते हैं। सड़कों पर हाय तौबा मचा देते हैं और सिरफुटव्वल की स्थिति निर्मित हो जाती है। जिन्सों से ऐसा प्यार, आपको इंसान से हैवान बना देता है। इसी हैवानियत की एक झलक परलकोट जलाशय में देखने को मिली। फोन की ऐसी पड़ी थी कि लाखों लिटर पानी बेकार बहा दिया। इतने पानी से डेढ़ हजार एकड़ के खेतों की सिंचाई हो सकती थी। यह पानी पालतु पशुओं और वन्यप्राणियों की प्यास भी बुझा सकती थी। मैं और मेरा के चक्कर में लापरवाही की भी हद होती है। अभी गर्मियां शेष हैं। बारिश होगी, नहीं होगी, होगी तो कितनी होगी, अभी किसी को पता नहीं है और यहां संचित जल को बहा दिया गया। इस अपराध की सख्त सजा मिलनी चाहिए।
Gustakhi Maaf: औकात से बाहर का फोन




