कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मोबाइल के लिए पखांजूर के परलकोट जलाशय का 21 लीटर पानी बहाने वाले अधिकारी को कलेक्टर ने सस्पेंड कर दिया है। यही नहीं कलेक्टर ने पखांजूर के अनुविभागीय अधिकारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कलेक्टर प्रियंका शुक्ला ने इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किया है।
बता दें पखांजूर के फूड इंसपेक्टर राजेश विश्वास का मोबाइल फोन 21 मई परलकोट जलाशय में गिर गया था। मोबाइन निकालने के लिए फूड इंसपेक्टर ने 21 मई से लगातार 4 दिनों तक परलकोट जलाशय के वेस्ट वियर से स्केल वाय के बीच लगभग 21 लाख लीटर पानी डीजल पंप के द्वारा बहा दिया गया । फूड इंसपेक्टर राजेश विश्वास अपना मोबाईल ढूंढने के लिए बिना अनुमति के जलाशय के वेस्ट वियर का 41104 क्यूबिक मीटर पानी खाली कराया गया है।
फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास का यह कारनामा पद के दुरुपयोग मामला माना गया है। इस संबंध में कलेक्टर प्रियंका शुक्ला ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने आदेश जारी कर कहा है कि फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास ने अपना मोबाइल ढूंढने के लिए अपने पद का दुरूपयोग किया है और सक्षम अधिकारी की अनुमति बिना परलकोट जलाशय से भीषण गर्मी में लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहा दिया जो कि उनके अशोभनीय आचरण को दिखाता है। उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के उपनियम (1) के विपरीत होने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला कार्यालय खाद्य शाखा कांकेर रहेगा तथा निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।
अनुविभागीय अधिकारी को नोटिस
इस मामले में कलेक्टर प्रियंका शुक्ला ने जलसंसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरसी धीवर को नोटिस जारी किया है। उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास ने जलाशय का पानी खाली कराने के लिए अनुविभागीय अधिकारी से मौखिक अनुमति लेने की बात कही है। कलेक्टर ने कहा है कि द्वारा उच्चाधिकारियों से अनुमति प्राप्त किए बिना परलकोट जलाशय से लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहा देने की मौखिक अनुमति देना कदाचरण की श्रेणी में आता है जो छत्तीगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) 1965 के नियम (1) (2) (3) विपरीत है । उक्त कृत्य के लिए क्यों आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए इसके लिए अपना जवाब 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करें। समय पर जवाब नहीं मिलने पर अनुविभागीय अधिकारी पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।




