ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: Gustakhi Maaf: श्रमिक दिवस का बोरे बासी कनेक्शन
Share
Notification Show More
Latest News
यातायात विभाग की कार्रवाई : सड़क पर बिजनेस करने वाले वाहन डीलरों  व आटो चालकों को समझाइश
October 17, 2026
नवरात्रि पर्व पर पूजा व गरबा पंडालों पर सुरक्षा के लिए तैनात दुर्ग पुलिस, 361 पुलिस कर्मी मैदान में
October 17, 2026
देवी पंडाल बने जनसमस्या निवारण के केंद्र, डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं
October 17, 2026
सेवा संकल्प अभियान के उद्देश्यों को मिलेगी मजबूती
सेवा की कहानी : महतारी सदन से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा सशक्तिकरण का नया आधार
October 17, 2026
मुख्य विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श
समान नागरिक संहिता पर जगदलपुर में उच्च स्तरीय समिति की बैठक
October 17, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
ChhattisgarhDurg-BhilaiFeatured

Gustakhi Maaf: श्रमिक दिवस का बोरे बासी कनेक्शन

By Om Prakash Verma Published May 1, 2023
Share
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
SHARE

-दीपक रंजन दास
चावल भारतीयों का मूल आहार रहा है। यह कम परिश्रम में तैयार होने वाला आहार है। धान से शुरू करें तो इससे पोहा, लाई, मुर्रा बनता है। चावल का भात, पुलाव, बिरयानी बनाया जा सकता है। भात को पानी में डुबोकर बासी या बोरे बनाया जा सकता है। ओड़ीशा में इसी को ठंडा पखाल और गर्म पखाल कहते हैं। बांग्ला में इसे पान्ता भात कहा जाता है। चावल को पीसकर इससे चिला, फरा, मुठिया बनाया जा सकता है। चावल के त्यौहारी व्यंजनों की तो लंबी फेहरिस्त है। इसी चावल को खाकर भारत के लोग स्वस्थ थे, मस्त थे। मोटापे का कहीं कोई नामोनिशान नहीं था। आज भी आम छत्तीसगढिय़ा, बंगाली, ओडिय़ा दुबला पतला ही है। पर इसी चावल को कुछ लोगों ने मोटापे का कारण बता दिया। लोग चावल से बचने लगे। रसोई बनाने वाले का श्रम बढ़ गया। पोषण की दृष्टि से देखें तो चावल और गेहूं दोनों ही अनाज हैं और दोनों में पोषक तत्व भी कमोबेश समान हैं। फर्क केवल इसे खाने के तरीके में होता है। गेहूं के साथ हम ज्यादा कुछ नहीं करते इसलिए उसका फाइबर कंटेंट बना रहता है जबकि चावल को पालिश करने पर उसका फाइबर कंटेंट कम हो जाता है। पर गांव के चावल के साथ ऐसा नहीं होता। चावल में वसा की मात्रा गेहूं से कम होती है। चावल में मैंगनीज, फास्फोरस, मैग्नीशियम, सेलेनियम, आयरन, फोलिक एसिड, थायमिन और नियासिन (विटामिन बी 3) भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके साथ यदि साग-सब्जी पर्याप्त मात्रा में ली जाए तो व्यक्ति को किसी सप्लिमेंट की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी। चावल की ताकत का अंदाजा लगाना है तो हमें मजदूरों का भोजन देखना चाहिए। सुबह भात खाकर घर से निकले मजदूर दोपहर को बासी खाते हैं। प्रचण्ड गर्मी में दिन भर काम करने के बाद भी न तो वह डीहाइड्रेशन का शिकार होते हैं, न ही उनके चेहरे पर कोई शिकन आती है। बल्कि बासी खाकर वह पेड़ के नीचे आधा एक घंटा लात तान कर सो भी लेता है। इसलिए बासी को मजदूरों का भोजन मान लिया गया। हालांकि इसमें कोई बुराई भी नहीं है। है यह मजदूरों और गरीबों का भोजन। पर इन्हीं मजदूरों और गरीबों के कारण प्रदेश में निर्माण होता है, तरक्की के रास्ते बनते हैं। फिर क्यों न इसे इसी रूप में सेलीब्रेट किया जाए? छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे श्रमिक दिवस के साथ जोड़कर एक अलग पहचान दे दी। श्रमिक दिवस की नींव 19वीं सदी में अमेरिका के शहर शिकागो में पड़ी थी। 1886 में एक मई को यहां श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्यदिवस के लिए आंदोलन किया था। छत्तीसगढ़ ने मई दिवस को बासी से जोड़कर इस पर्व को स्थानीय महत्व प्रदान कर दिया। छत्तीसगढ़ अब एक मई को स्मरण दिवस के रूप में नहीं बल्कि श्रम के सम्मान दिवस के रूप में मनाता है। इसलिए तो कहते हैं ‘छत्तीसगढिय़ा-सबले बढिय़ा।’

You Might Also Like

यातायात विभाग की कार्रवाई : सड़क पर बिजनेस करने वाले वाहन डीलरों  व आटो चालकों को समझाइश

नवरात्रि पर्व पर पूजा व गरबा पंडालों पर सुरक्षा के लिए तैनात दुर्ग पुलिस, 361 पुलिस कर्मी मैदान में

देवी पंडाल बने जनसमस्या निवारण के केंद्र, डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

सेवा की कहानी : महतारी सदन से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा सशक्तिकरण का नया आधार

समान नागरिक संहिता पर जगदलपुर में उच्च स्तरीय समिति की बैठक

Om Prakash Verma May 1, 2023
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनी तो लागू होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड, गरीब परिवारों को आधा लीटर दूध और 10 हजार की एफडी
Next Article Nephrotic Syndrome: इन लक्ष्णों को न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह गंभीर बीमारी Nephrotic Syndrome: इन लक्ष्णों को न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह गंभीर बीमारी

Ro.No.-14097/18

× Popup Image

Ro. No.-14093/1

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?