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Gustakhi Maaf: मानव का शरीर एक पर इलाज अनेक

By Om Prakash Verma
Published: June 14, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
मनुष्य बीमार पड़े तो उसका इलाज कौन करे? सनातन की बात करें तो जिसे इलाज की समझ होती है, वही इलाज कर सकता है। आज दर्जनों चिकित्सा पद्धतियां मौजूद हैं। एलोपैथी के अलावा यूनानी, होम्योपैथी, आयुर्वेद, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंचर, कपिंग हिजामा जैसी तमाम थेरेपियां मौजूद हैं। इनमें से एलोपैथी, यूनानी, होम्योपैथी और आयुर्वेद स्वीकृत चिकित्सा पद्धतियां हैं। इनकी पढ़ाई होती है। डिग्रियां और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रियां भी मिलती हैं। इन सभी पद्धतियों में एनाटोमी अर्थात शरीर रचना विज्ञान तथा फिजियोलॉजी अर्थात शारीरिक प्रक्रिया विज्ञान की पढ़ाई समान होती है। बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड सर्जरी MBBS, बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी BAMS और बैचलर ऑफ होमियोपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी BHMS के कोर्स में प्राथमिक सर्जरी शामिल है। औषधियों की पढ़ाई अलग-अलग होती है। आम आदमी होमियोपैथी को मीठी गोली का धोखा और आयुर्वेद को घास-फूस का तिलिस्म मानता है। पर जब एलोपैथी सर्जरी की बात करता है तो यही लोग आयुर्वेद और होमियोपैथी की ओर दौड़ लगाते हैं। होमियोपैथी ने इसका लाभ भी लिया है। अब होम्योपैथी की दवा किसी लकड़ी के बक्से से नहीं निकलतीं बल्कि शानदार पैकिंग में आती हैं और उनकी कीमतें भी एलोपैथी के बराबर होती हैं। आयुर्वेद की दवाइयां तो हमेशा से ही महंगी रही हैं। छत्तीसगढ़ में सरकारी आयुर्वेद और होमियोपैथी के अस्पताल हैं जहां इलाज नि:शुल्क होता है। लोग दवाइयां ले जाते हैं और उन्हें घर के कोने में फेंक देते हैं। भारत की इस प्राचीन विद्या की बेइज्जती का सबसे बड़ा कारण भी यही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ये सभी डाक्टर एक दूसरे की विधियों की दवाइयां लिख सकते हैं? कायदे से तो जिसने जो विद्या सीखी है, उसे उसी विद्या के प्रयोग की अनुमति होनी चाहिए। पर कुछ राज्यों की सरकारों ने आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों को एलोपैथी की अनुमति दे रखी है। छत्तीसगढ़ में भी 2019 में हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने यह अनुमति प्रदान की है। महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला चौथा राज्य है। पर यह अनुमति केवल प्राथमिक उपचार तक सीमित है। फिलहाल डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एलोपैथी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आयुर्वेद के चिकित्सक विभिन्न अस्पतालों के आईसीयू में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पर कुछ चिकित्सक अपने क्लीनिक में ही सर्जरी कर रहे हैं। यह गलत है। कई बार ऐसा होता है कि एलोपैथी की दवाओं की पूरी-पूरी समझ नहीं होने के कारण गैर एलोपैथी चिकित्सक ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो मरीज को मुसीबत में डाल देते हैं। जान जाने तक की नौबत आ जाती है। बड़े अस्पतालों में आने वाले रोगियों में एक बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जो गलत इलाज का खामियाजा भुगत रहे होते हैं। किसी को सही दवा की गलत डोज दी गई होती है तो किसी को गलत दवाई दी गई होती है। इसलिए जनहित में सावधानी जरूरी है।

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