-दीपक रंजन दास
ऐसा पहली बार हुआ है कि एक पूरे राज्य का चुनाव एक सट्टा-ऐप पर जा टिका है। इस मामले की ताजा स्थिति, उलटा चोर कोतवाल को डांटे वाली हो गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर को भी लगता है कि छत्तीसगढ़ कमर पर गमछा लपेटकर सुअर का शिकार करने वाले वनवासियों का प्रदेश है। उन्हें लगता है कि वह जो भी कहेंगे लोग उसपर यकीन कर लेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के पास आइटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत वेबसाइट को बंद करने की सिफारिश करने का पूरा अधिकार था, जो राज्य सरकार ने नहीं किया। ऐसी सिफारिश ईडी की तरफ से आने के बाद ऐप को बैन किया गया। इस केन्द्रीय मंत्री को तो पता ही नहीं है कि महादेव ऐप के खिलाफ कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस ने ही शुरू की थी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने 30 मार्च 2022 को इस ऐप के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया था। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस अब तक 450 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर करोड़ों रुपए के लैपटॉप, मोबाइल डिवाइस, चल-अचल संपत्ति जब्त करने के साथ ही लगभग 16 करोड़ रुपए के बैंक खातों को फ्रीज कर चुकी है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने मध्यप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और अन्य राज्यों में छापेमारी की है। जुलाई 2023 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने इसके प्रमोटर्स और ऑपरेटर्स के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। ईडी ने भी छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज मामलों का ही संज्ञान लेकर इसमें अपने हाथ डाले थे। दुर्भाग्य की बात केवल यह है कि इस ऐप को प्रमोट करने वाले छत्तीसगढ़ से हैं। मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दोनों भिलाई के रहने वाले हैं। पर इस ऐप का संचालन दुबई से किया जाता है। इस ऐप पर दुनिया के किसी भी लोकेशन से बेटिंग की जा सकती है। पिछले डेढ़ साल से केन्द्रीय एजेंसियां इस मामले में मनी लांडरिंग को लेकर जांच कर रही है। इसके बावजूद यदि केन्द्रीय मंत्री कहते हैं कि छत्तीसगढ़ को ऐप को बैन करने का रिक्वेस्ट करना था, तो वह सफेद झूठ बोल रहे हैं। दरअसल, केन्द्र के पास भी ऐप को बैन करने से ज्यादा कुछ करने का अधिकार ही नहीं है। किसी ऐप को बैन कर देने पर संचालक उसका डोमेन बदल देते हैं। केन्द्र ने कई पोर्न वेब साइट्स को भी बैन किया हुआ है। सभी डोमेन बदल कर सक्रिय हैं। 2019 के लिए उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत के 89 फीसद स्मार्टफोन यूजर पोर्न देखते हैं। महादेव ऐप के साथ भी यही हुआ। इधर ऐप बैन हुआ और उधर उसका नया डोमेन जारी कर दिया गया। वैसे भी वीपीएन सेवा तो है ही। जाहिर है कि इस फालतू काम को करने में केन्द्र की कोई दिलचस्पी नहीं थी। ईडी भी इस मामले में ऑनलाइन सट्टा की नहीं बल्कि मनी लांडरिंग की जांच कर रही है। वह तो छत्तीसगढ़ में चुनाव हो रहे हैं, इसलिए….।





