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Gustakhi Maaf: चाय तो व्यवहार है, सेहत से क्यों जोड़ें

By Om Prakash Verma Published February 6, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
भारत के लिए चाय एक व्यवहार है. यहां गरीब से गरीब आदमी भी मेहमान को कम से कम चाय के लिए जरूर पूछता है. किसी ने अगर चाय के लिए नहीं पूछा तो लोग बुरा मान जाते हैं. चाय ने अच्छे-अच्छों की किस्मत भी बदली है. चाय बेचकर कई लोग करोड़पति हुए हैं. कहा जाता है कि देश के प्रधानमंत्री भी पहले चाय ही बेचा करते थे. छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई की एक चाय दुकान तो पूरे शहर का मीटिंग पाइंट ही बन गया. उसकी दुकान कुछ इतना मशहूर हुई कि उसके पास खुला एक रेस्तरां देखते ही देखते बिना किसी विज्ञापन के शहर का सबसे पसंदीदा वेज डाइनिंग सेन्टर बन गया. जी हां! हम बात कर रहे हैं नन्हे चाय दुकान की. जब तक नगर प्रशासन इसका ठेला हटाता वह इतना कमा चुका था कि यहां की चीप मार्केट की दो दुकानें खरीद लीं. अब सड़क किनारे ठेला लगाना, गुमटी में धंधा करना या दुकान खरीदना हर किसी के बस का रोग तो नहीं होता. कुछ लोगों के पास आइडिया था. उन्होंने “अमृततुल्य चाय” का फार्मूला तैयार किया. साथ ही ब्रांड को देशभर में पहुंचाने का तरीका भी ढूंढ निकाला. जिनके पास 150-200 फीट जगह है, उन्हें वो मुफ्त में फ्रेंचाइजी देते हैं. शर्त केवल यही होती है कि चाय बनाने का पूरा साजो सामान “अमृततुल्य” से लेना होगा. यह सामान कोई 2.5 से 3 लाख रुपए का होता है. कंपनी यह सारा सामान पहुंचाकर, लगाकर देती है. इसमें दुकान का बोर्ड और एक पुतला भी शामिल होता है जो भारतीय परिधान में चाय की केतली और कप लिये खड़ा रहता है. शर्त यह भी होती है कि चाय पत्ती, चीनी और चाय मसाला कंपनी की होगी. बनाने की विधि भी कंपनी की होगी. बेचने वाले को केवल बनाना, बेचना और मुनाफे का 80 प्रतिशत अपने पास रखने का अधिकार होगा. वह चाहे तो इसके साथ कोई भी नाश्ता बेच सकता है जिसका पूरा मुनाफा उसका अपना होगा. यह तो हुई धंधे की बात. चाय की एक अपनी संस्कृति है. चाय पीने के बाद कोई सुरती मलता है तो कोई सिगरेट फूंकता है. कोई-कोई चाय पिलाने के बाद सौंफ, सुपारी, लौंग-इलायची भी परोसता है. अधिकांश चाय दुकान वाले चाय के साथ बीड़ी-सिगरेट भी रखते हैं. रायपुर में अमृततुल्य के एक फ्रेंचाइजी से गुस्ताखी यह हो गई कि अमृततुल्य चाय के साथ उसने सिगरेट रखना शुरू कर दिया. अमृत के साथ जहर बेचना सर्वथा अनुचित है? भई यह चाय है. लिपटन की चाय पीकर लोग खुले जंगल में शेर से आंखें मिलाया करते थे. चाय पीकर बकरी आज भी बाघ के साथ एक घाट पर पानी पीती है. हजारों नाम हैं इस चाय पत्ती के. जिसमें जितनी ज्यादा खुशबू, उसमें उतना ज्यादा जहर. पर चाय पत्ती वालों को कुछ कहने की हिम्मत किसी में नहीं है. बदनाम तो तंबाकू है, इसलिए सूली पर भी वही चढ़ेगा.

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Om Prakash Verma February 6, 2023
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