-दीपक रंजन दास
अंबिकापुर सेन्ट्रल जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप हैं कि यहां महिलाओं को सम्मान और पर्याप्त भोजन के लिए महिला जेलर और मुख्य प्रहरी को पैसे देने पड़ते हैं। कोई नई बात नहीं है। जेल में सुविधाओं के लिए पैसों का लेन-देन छोटी जेलों से लेकर तिहाड़ तक बराबर होता है। कैदियों के लिए घर वाले भी खाने-पीने की चीजें लेकर आते हैं पर कैदी उसे खा भी पाएगा या नहीं, यह जेल प्रशासन पर निर्भर करता है। कैदियों को कैदियों से पिटवा देना, उन्हें भूखा रखना, उन्हें सोने नहीं देना जैसी घटनाएं आम होती हैं। पर अंबिकापुर सेन्ट्रल जेल प्रशासन पर जो आरोप लगे हैं वो दिलचस्प हैं। बंदी के परिजनों के हवाले से एक अधिवक्ता ने राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, गृह विभाग के सचिव, जेल विभाग के महानिदेशक, सरगुजा कलेक्टर और केंद्रीय जेल के अधीक्षक से लिखित शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि समय पर पैसा नहीं देने वाले कैदियों को महिला बंदी नंबरदार निर्वस्त्र कर देती हैं। इसके बाद उनके साथ गंदी हरकत की जाती है। महिला जेलर अपने मोबाइल पर उनका वीडियो बनाती है। इस वीडियो को विरोधी पक्ष को भेजने की धमकी दी जाती है। उन्हें भूखा रखा जाता है। वैसे भी अंतरराष्ट्रीय शोध बताते हैं कि कैदियों के साथ रहते-रहते जेल कर्मियों और अधिकारियों की मानसिकता विकृत हो जाती है। जेल में वैसे भी या तो सजा काट रहे अपराधी होते हैं या फिर विचाराधीन बंदी। इन्हीं में से कुछ लोगों को चुनकर नंबरदार बनाया जाता है। जेल में कैदियों की रैगिंग, मारपीट, यहां तक कि हत्या कर देने के भी सैकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे। यह सब जेल प्रशासन के इशारे पर या फिर उसकी मर्जी से होता है। पर इस बार जो मामला सामने आया, वह थोड़ी भिन्न प्रकृति का है। जेल में यौन शोषण कैदी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त करने के लिए किया जा सकता है। यह यौन विकृति को तृप्त करने के लिए भी हो सकता है। पर तीसरी बड़ी संभावना पोर्न इंडस्ट्री से कमाई की बनती है। ऐसे वीडियोज की देश-विदेश में अच्छी खासी मांग है। वजह चाहे जो भी हो, शिकायत मिलते ही जेल प्रशासन को जांच शुरू कर देनी थी। जेल के अंदर क्या होता है, इसमें बहुत कम लोगों की रुचि होती है। पर खबर मसालेदार हो तो हर कोई हकीकत जानना चाहता है। ऐसे में जेल प्रशासन का यह कहना कि किसी को शिकायत है तो वह सामने आए, किसी को भी हजम नहीं होगा। वैसे प्रशासन ने यह भी कहा कि जेल में मोबाइल फोन सभी के लिए प्रतिबंधित है। भई! यह तो कोई जवाब नहीं हुआ। अगर स्त्री को मां, बहन, बेटी, आदि मानते हो तो शिकायत पर तत्काल जांच शुरू कर देनी चाहिए। कैदी बयान देंगे नहीं। देंगे भी तो उनकी सुनेगा कौन? मोबाइल भी गायब हो जाएगा। फिर इस अडिय़लपन का क्या मतलब?





