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Gustakhi Maaf: एक पटरी पर दो ट्रेन और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नल

By Om Prakash Verma
Published: June 12, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
ओड़ीशा के बालेश्वर में हुए ट्रेन हादसे के बाद रेलवे का सिग्नल सिस्टम विवादों के घेरे में है। अब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के जयरामनगर हॉल्ट स्टेशन का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें कोरबा-बिलासपुर मेमू लोकल को एक पटरी पर खड़े दिखाया गया है। इसी पटरी पर सामने से एक मालगाड़ी भी आती दिखाई दे रही है। सुरक्षित दूरी रखते हुए मालगाड़ी रुक जाती है और हंगामा खड़ा हो जाता है। कहा जाता है कि ट्रेन को किसी तरह रोक लिया गया और एक बड़ा हादसा टल गया। रेलवे का स्पष्टीकारण है कि यह वीडियो जयरामनगर हॉल्ट स्टेशन का है जहां ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम स्थापित है। आखिर ABSS है क्या? क्यों एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आ जाती हैं। दरअसल, सभी रेलवे ट्रैक पर एक ही समय में कई गाडिय़ां होती हैं। पहले इनके बीच इतनी अधिक दूरी होती थी कि दूसरी ट्रेन दिखाई नहीं देती थी। इसकी वजह से काफी वक्त जाया होता था। ABSS इसी समस्या का समाधान है। इसमें ट्रेनें ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम से चलती हैं। इससे ट्रेनों के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है। उदाहरण के लिए मान लें कि किसी ट्रैक पर चार सिग्नल हैं। सिग्नल हमेशा हरा रहता है। जैसे ही एक ट्रेन सिग्नल को पार करती है वह लाल हो जाता है। ट्रेन जब उसके बाद के सिग्नल को पार कर 120 मीटर आगे निकल जाती है तो यह सिग्नल एक पीली बत्ती में बदल जाता है। ट्रेन जब तीसरे सिग्नल को पार कर 120 मीटर आगे निकल जाता है तब पहला सिग्नल दो पीली बत्ती और दूसरा सिग्नल एक पीली बत्ती में तब्दील हो जाता है। ट्रेन के चौथे सिग्नल को पार करते ही पहला सिग्नल हरा, दूसरा दो पीली बत्ती और तीसरा सिग्नल एक पीली बत्ती में बदल जाता है। इससे दो ट्रेनों के बीच की दूरी घट जाती है और एक ट्रेन के छूटने के बाद दूसरी ट्रेन के आने का वक्त पुरानी पद्धति की तुलना में काफी कम हो जाता है। दो पीली बत्ती पार करते समय लोको पायलट को पता होता है कि आगे दो सिग्नल के बाद कोई ट्रेन है। इसी तरह एक पीली बत्ती उसे अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहता है क्योंकि अगली ट्रेन एक सिग्नल आगे ही है। वह किसी भी समय ट्रेन रोकने के लिए तत्पर रहता है। यह सिग्नल पद्धति ट्रेन की पटरी पर स्थिति के आधार पर संचालित होती है। इसमें एक पीली बत्ती को पार करते समय ट्रेन की स्पीड 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रहती है। पर इस सिस्टम में सभी ट्रेनें एक दूसरे के पीछे चल रही होती हैं, एक दूसरे के आमने सामने नहीं आ सकतीं। यह तभी संभव है जब एक पटरी पर जो ट्रेन पहले से खड़ी हो और वह पटरी बदलकर आगे बढऩे वाली हो। जयरामनगर में भी शायद यही हुआ।

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