भिलाई। पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने सोमवार को बीएसपी टाउनशिप के लीज रजिस्ट्री को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन पुरानी शर्तों का हो रहा है, जिसमें बीएसपी प्रबंधन और लीजधारक के मध्य किया गया एग्रीमेंट अब रजिस्टर हो गया है और जिसे मानने के लिए दोनों पक्ष बाध्य हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लीज रजिस्ट्री को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, लीजधारक अपने विवेक से शर्तों को अध्ययन कर निर्णय़ लें।
“बात भिलाई की” कार्यक्रम के तहत सोमवार को पूर्वमंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि लीज एग्रीमेंट के विषय पर बहुत सारे लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं। भिलाई के विधायक कह रहे हैं कि घोषणा पत्र में किया हुआ एक और वादा पूरा हुआ, जबकि फेस 6 की लीज का वादा वो तो अब भी अधूरा ही है। लीज एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन को स्पष्ट करते हुए पाण्डेय ने कहा कि यह केवल बीएसपी प्रबंधन औऱ लीजधारकों के मध्य 20-22 वर्षों पूर्व हुई लीज एग्रीमेंट का शुल्क अदा कर किया हुआ रजिस्ट्रेशन है। यह पहले स्टाम्प पेपर पर हुआ था लेकिन रजिस्टर होने के बाद लोग भ्रम फैला रहे हैं कि लीजधारकों को मालिकाना हक मिल गया जबकि ऐसा कुछ नहीं है।
मालिकाना हक बीएसपी के पास
पूर्व मंत्री पाण्डेय ने कहा कि रजिस्ट्रेशन केवल एग्रीमेंट के पेपर का हुआ है लेकिन मालिकाना हक अब भी बीएसपी प्रबंधन के पास है और लीजधारक के पास राइट टू एंजाय का अधिकार। जो कि वह पिछले 20-22 वर्षों से वैसे ही कर रहा था, उन्हें कोई भी नहीं भगा रहा था और न हटा सकता था। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन के पश्चात इन शर्तों में लोक परिसर अधिनियम 1971 के तहत कानून भी लागू होगा जिसमें किसी भी प्रकार की विवाद की स्थिति में बीएसपी प्रबंधन का निर्णय ही अंतिम और मान्य होगा। वास्तव में डीड, एग्रीमेंट, इकरारनामा, अनुबंध सभी शब्दों के मायने एक ही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मालिकाना हक होता तो वह हुडको की तरह सेल (विक्रय) डीड होती। पूर्व मंत्री ने यह मांग की है कि सीएम बिना शर्तों के हुडको के समान रजिस्ट्री कर लोगों को मालिकाना हक दिलाएं।




