धमतरी। जिले में कृषि भूमि की उर्वराशक्ति को बनाए रखने तथा किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा “खेत बचाओ अभियान” संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत धमतरी सहित जिले के सभी विकासखंडों-कुरूद, मगरलोड और नगरी के विभिन्न ग्रामों में किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करने संबंधी जानकारी दी जा रही है।
कृषि विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी अमले द्वारा किसानों को बताया जा रहा है कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का आवश्यकता से अधिक उपयोग न केवल फसलों की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि भूमि की उर्वराशक्ति, पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी जा रही है।
हाल ही में ग्राम फरसगांव एवं अमाली,गोरेगांव,संकरी आदि में आयोजित कृषक जागरूकता कार्यक्रमों में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद तथा नीलहरित शैवाल (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के उपयोग की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इन जैविक विकल्पों के प्रयोग से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है तथा खेती की लागत में कमी आती है।
अभियान के दौरान किसानों को फसल चक्र अपनाने, जैविक अपशिष्टों के पुनः उपयोग, जल संरक्षण तकनीकों तथा एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे संतुलित एवं वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों को अपनाकर अपनी भूमि की उत्पादकता को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखें तथा पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दें। यह अभियान जिले में सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से निरंतर संचालित किया जा रहा है।




