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एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

By Mohan Rao Published July 2, 2026
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले। इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों – एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग – पर कार्य किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

बैठक में सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें।

बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टॉवर स्थापित कर राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण आगामी एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें और डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36 विभागों की 520 सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड तथा 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16 हजार 726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए 94.3 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सेवा सेतु में क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ट्रेजरी एवं ई-चालान प्रणाली तथा डीबीटी आधारित भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।  अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक , सुशासन तथा अभिसरण विभाग के संयुक्त एवं  चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्री मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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