रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन प्रदेश सरकार परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर रोक के लिए ‘छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक, 2026’ लेकर आई है। इस विधेयक में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर त्वरित और पारदर्शी जांच के साथ कड़ी कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं।

इस बिल में अभ्यर्थियों के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं। नकल करते पकड़े जाने पर उनका रिजल्ट रोका जाएगा और उन्हें 1 से 3 साल तक परीक्षा देने से बैन किया जाएगा। हालांकि, यह बैन स्थायी नहीं होगा और तय अवधि के बाद अभ्यर्थी फिर से परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। अन्य दोषियों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में 3 से 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, गंभीर उल्लंघन जैसे पेपर लीक, अवैध प्रवेश या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के मामलों में 1 से 5 साल तक की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा।
इसके अलावा, परीक्षा से जुड़ी संस्थाओं और एजेंसियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगेगा, साथ ही कम से कम 3 साल तक परीक्षा कराने से बैन किया जाएगा और परीक्षा से संबंधित खर्च की वसूली भी की जाएगी। बिल में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि किसी डायरेक्टर या अधिकारी की सहमति या लापरवाही सामने आती है, तो उन्हें 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।




